दिसंबर 2023 की घटना के बाद व्यापक सुरक्षा समीक्षा के आधार पर संसद भवन परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत किया गया है। 20 मई 2024 को चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत CISF ने संसद भवन परिसर (PHC) की सभी मुख्य सुरक्षा परतों का संचालन पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। इसमें एक्सेस कंट्रोल, परिधि सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, काउंटर-टेरर और काउंटर-सबोटाज प्रतिक्रिया, बम खतरा प्रबंधन और अग्नि व आपदा तैयारी शामिल हैं।
3,300 से अधिक विशेष प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें 200 से ज्यादा फायर और डिज़ास्टर मैनेजमेंट विशेषज्ञ शामिल हैं। अब संसद भवन में एयरपोर्ट-स्टाइल सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाए गए हैं, जैसे उन्नत फ्रिस्किंग, X-रे बैगेज स्कैन और मल्टी-लेवल एक्सेस वेरिफिकेशन। साथ ही CISF लगातार उभरते सुरक्षा खतरों के अनुसार अपनी क्षमताओं को बढ़ा रही है। इसमें ड्रोन खतरों, साइबर सुरक्षा, CBRN प्रतिक्रिया और NSG व भारतीय सेना के साथ बैटल-इनोकुलेशन प्रशिक्षण शामिल हैं।
CISF संसद सुरक्षा (CISF Parliament Security): विस्तारित पोस्टिंग नीति: स्थिरता और विशेषज्ञता पर जोर
संसद सुरक्षा CISF डीआईजी अजय दहिया के मुताबिक PHC सुरक्षा के लिए CISF ने नई पोस्टिंग नीति लागू की है। अब कर्मियों का कार्यकाल तीन वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष कर दिया गया है, और suitability के आधार पर एक वर्ष का विस्तार भी संभव है। हर वर्ष एक तय अनुपात में कर्मियों को रोटेट किया जाएगा ताकि प्रशिक्षण एवं परिचालन में निरंतरता बनी रहे।
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लंबा कार्यकाल संसद सदस्यों, परिसर की गतिविधियों और मूवमेंट पैटर्न से परिचय को बढ़ाता है, जो पहचान, एक्सेस कंट्रोल और खतरे की परतबद्ध पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कड़े पात्रता मानदंड और मल्टी-स्टेज स्क्रीनिंग
PHC ड्यूटी के लिए चयनित कर्मियों पर विशेष पात्रता नियम लागू हैं। चयनित कर्मियों को:
• स्वच्छ सेवा रिकॉर्ड रखना
• SHAPE-I मेडिकल कैटेगरी में होना
• कोई अनुशासनात्मक या विजिलेंस मुद्दा नहीं होना
• कम से कम 2 विशेषीकृत कोर्स पूरे किए हों
• पद के अनुरूप आयु मानकों को पूरा करना
डिप्लॉयमेंट से पहले सभी उम्मीदवार इन चरणों से गुजरते हैं:
• Psychological Assessment
• Battle Physical Efficiency Test (BPET)
• PHC-Specific Induction Training
• Comprehensive Security Clearance
सिर्फ पूरी तरह योग्य कर्मियों को ही संसद सुरक्षा में तैनात किया जाता है।
उन्नत ट्रेनिंग और तैयारियां
CISF के कर्मी लगातार ऑन-साइट और ऑफ-साइट प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रमुख प्रशिक्षण कार्यक्रम:
• NSG Customized Training – Manesar
• Counter-Terror Training with Indian Army – Srinagar
• CAT (Contingency Action Team) Course – RTC Behror
• Sniper Course – RTC Behror
• CRT Course – NISA
• Armed Support Training – विभिन्न CISF RTCs
उच्च स्तर की तत्परता सुनिश्चित करने के लिए नियमित अभ्यास किए जा रहे हैं। इनमें ड्रोन खतरे, साइबर हमले, आतंकी हमले, CBRN घटनाएं, बम खतरा, निकासी ऑपरेशन और वायु प्रदूषण घटनाओं जैसे परिदृश्यों पर आधारित मॉक-ड्रिल शामिल हैं। नाइट-फायरिंग अभ्यास भी निरंतर किए जा रहे हैं।
अब तक 12 मल्टी-एजेंसी मॉक-ड्रिल दिल्ली पुलिस, NSG, IB, NDRF और NDMC के साथ मिलकर आयोजित की जा चुकी हैं। सभी PHC-डिप्लॉय कर्मियों के लिए वार्षिक Psychological Test और BPET अनिवार्य होंगे, जबकि QRT कर्मियों के लिए BPET हर महीने जारी रहेगा।
भविष्य के लिए और भी मजबूत सुरक्षा कवच
नई पोस्टिंग नीति, कड़े चयन मानदंड और लगातार चल रहे उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम साबित करते हैं कि संसद भवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। युवा, फुर्तीले और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर्मियों की तैनाती के साथ CISF देश की सर्वोच्च विधायी संस्था को आधुनिक खतरों से सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह भविष्य-तैयार हो चुकी है।
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