लोकसभा चुनाव 2024 में दो सांसद ऐसे भी हैं जो जेल में रहते हुए निर्वाचित हुए हैं। क्या आप जानते हैं कि जेल में रहकर निर्वाचित सांसद कैसे काम कर सकते हैं। जेल में बंद सांसदों के लिए पूरी नियमावली है। हमारे देश में जेल में रहकर चुनाव लड़ना और जीतना कोई नई बात नहीं है, मगर आप में से कम ही लोग जानते होंगे कि लोक प्रतिनिधि के लिए जेल के नियम क्या कहते हैं। आइए जानते हैं कि ये नियम क्या हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 में इन लोगों ने जेल में रहकर जीत दर्ज की है
लोकसभा चुनाव 2024 में दो सीटें ऐसी हैं जहां के उम्मीदवारों ने जेल में रहकर चुनाव लड़ा है और जीत कर आए हैं। पंजाब के खडूर साहिब सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खड़ा अमृतपाल सिंह चुनाव जीत गया है। वह नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। उसने अपना नामांकन जेल से ही भरा था।
इसी तरह जम्मू-कश्मीर के बारामूला सीट से जीत दर्ज करने वाले राशिद शेख भी जेल में है। इंजीनियर राशिद ने अपने प्रतिद्वंदी उमर अबदुल्ला को 2 लाख 32 हजार 73 वोटों से हराया है। राशिद शेख पर टेरर फंडिंग लेने का आरोप है। वह तिहाड़ जेल में है। उस पर यूएपीए के तहत गंभीर आरोप लगे हुए हैं। राशिद शेख के जेल में रहते हुए उसके प्रचार की कमान दोनो बेटों ने संभाली थी।
यह है नियम
भारत में यह पहली बार नहीं है जब जेल में रहकर कोई सांसद चुना गया हो। इसके पहले दर्जनों ऐसे नेता हैं जिन्होंने जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मुख्तार अंसारी ने जेल में रहते हुए उत्तर प्रदेश की मऊ विधानसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज कल्पनाथ राय के खिलाफ बसपा के टिकट पर जीत हासिल की थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय ने 1996 का लोकसभा चुनाव जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा था और घोसी सीट पर मुख्तार अंसारी को हराकर जीत दर्ज की थी।
भारतीय संविधान के नियमों के मुताबिक जेल से कोई भी भारतीय नागरिक चुनाव लड़ सकता है। लोक प्रतिनिधित्व 1951 की धारा 62(5) के तहत जेल में बंद कैदी को वोट देने का अधिकार नहीं होता है। कोई सांसद जब तक जेल में बंद है अपना सांसद प्रतिनिधि बनाकर क्षेत्र के लिए कार्य कर सकता है। लेकिन अगर उसे किसी मामले में दो साल से अधिक की सजा मिलती है तो उसकी सदस्यता रद्द हो जाएगी।
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