पुलिस डायरी से/ जब शराब की बोतल ने सुलझाया केस

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मामला दक्षिणी दिल्ली के पॉश इलाके वसंत कुंज का है और जल्द ही कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने वाली है। एक लाश के पास मिली शराब की बोतल का बार कोड किस तरह पुलिस का मुखबिर बना पढ़िए विस्तार से। 

पुलिस टीम ने 22 हजार मोबाइल फोन नंबर छांटे थे इनमें से 722 नंबर पर ध्यान केंद्रीत किया गया और 240 नंबरों को जांच के दायरे में लिया गया। जांच की यह जानकारी तो बस नमूना भर है। आप जैसे जैसे तफ्तीश की यह डायरी पढ़ते जाएंगे आपके चौंकने की सीमा भी उसी अनुपात में बढ़ेगी। तो सबसे पहले जानिए कि मामला क्या था।

(1) मामला क्या था –

बात 7 जून 2019 की है। वसंत कुंज पुलिस थाने को कंट्रोल रूम के जरिए कॉल मिली की फार्म नंबर 180 में एक लाश पड़ी हुई है। मौके पर पहुंची पुलिस को 30-35 साल के एक युवक की खून से सनी लाश मिली। लाश के निकट ही कुछ खून से सनी ईंटे पड़ी हुईं थीं, एक शराब के पौव्वे की बोतल औऱ बीयर का बोतल भी पास में ही पड़े हुए थे। मगर मौके पर कुछ भी ऐसा नहीं था जो लाश की शिनाख्त में मदद करे। मौके पर क्राइम टीम औऱ एफएसएल की टीम पहुंची। लाश को सफदरजंग अस्पताल में शिनाख्त के लिए सुरक्षित रखवा दिया गया।  

किराने की दुकान से सामान लेते समय सीसीटीवी
में कैद किशन

(2) पुलिस टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आलाकमान ने एसीपी रमेश कुमार की देखरेख औऱ वसंत कुंज एसएचओ संजीव कुमार के नेतृत्व में एसआई रोहित कुमार, संदीप शर्मा, सुभाष, भगवान सिंह, संदीप सुथर, एएसआई विजेन्दर सिंह व अन्य पुलिसकर्मियों की टीम बना दी। टीम का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने मामले की जांच शुरू करते समय अनुमान भी नहीं लगाया था कि यह मामला पूरी तरह ब्लाइंड होगा।

(3) पुलिस जांच

पुलिस टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाश की पहचान थी। इसके लिए पुलिस ने एड़ी चोटी की जोर लगा दी। बस स्टैंड, बाजार आदि जगहों पर लाश की शिनाख्त के लिए बड़े-बड़े पोस्टर लगवाए गए। मौके पर मिली लाश से लेकर हरेक चीज किसी भी तरह की सुराग देने से मना कर रही थी।  

इंस्पेकेटर संजीव कुमार

(4) पहला सुराग

पुलिस ने लाश की शिनाख्त और कत्ल के बारे में पता करने के लिए कई मशक्कत कर लिए। इनमें 22 हजार से ज्यादा मोबाईल फोन नंबर की जांच के अलावा, घर-घर जाकर पूछताछ, आटो चालकों से जानकारी एकत्रित करना तो शामिल है हीं। अखबार में लाश की फोटो और कई दिनों तक सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों का भटकना तक शामिल है। लेकिन यह सारी मशक्कत बेकार साबित हो रही थी। डेढ़ महीने से ज्यादा हो चुके थे। पुलिस ने इस बीच आधार कार्ड की जांच से लेकर हर कोशिश कर ली थी। मगर ना तो कोई चश्मदीद गवाह मिल रहा था और ना ही लाश की पहचान हो रही थी।

(5) बोतल का बार कोड

 ऐसे में लाश के पास से मिली शराब की बोतल का बार कोड पर पुलिस का ध्यान केंद्रीत हुआ। ठेके पर शराब लेते समय दुकानदार बोतल पर यह बार कोड लगाता है। पुलिस ने मौके पर पड़ी बोतल की बार कोड के जरिए अब सबसे पहले उस ठेके की तलाश शुरू की जहां से शराब खरीदी गई थी। शराब की बोतल के बारकोड की सघन जांच से पता लगा कि बोतल वसंतकुंज के डीडीए मार्केट स्थित दुकान से खरीदी गई थी। पुलिस के पास पहला सुराग यही था। लाश को शव गृह में सुरक्षित रखवाए हुए काफी दिन हो गए थे।

(5) सुराग से आगे 

शराब की बोतल पर लगे बारकोड के जरिए पुलिस ठेके तक तो पहुंच गई लेकिन हर रोज सैकड़ो की संख्या में आने वाले शराब के ग्राहकों में से मृतक या कातिल को तलाशना भूसे की ढेर में सूई तलाशने के समान था। पुलिस ने सीसीटीवी खंगालने का फैसला किया। सीसीटीवी की गहनता से जांच करने पर पता लगा कि वसंत कुंज के डीडीए मार्किट से शराब खरीदते समय मरने वाले युवक ने नीले रंग की टी शर्ट पहन रखी थी और उसके साथ रंगीन स्ट्रीप वाला सफेद टी शर्ट पहने एक और शख्स था। इसी दूसरे शख्स ने शराब की क्वार्टर बोतल खरीदी थी।

पुलिस ने अब ठेके के आसपास की किरयाने आदि की दुकानों की सीसीटीवी खंगालनी शुरू की। एक किराने की दुकान पर दोनों नमकीन, ग्लास आदि खरीदते नजर आ गए। इसी सीसीटीवी से मृत युवक की तस्वीर निकालकर पुलिस ने उसके शिनाख्त के लिए पोस्टर से लेकर प्रचार आदि का सहारा लिया था।

इस बीच पहचान ना हो पाने की वजह से पुलिस ने 22 जून को शव का पोस्टमार्टम करा लिया। 5 जुलाई को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई जिसमें मरने की वजह सिर पर भारी चीज से चोट बताई गई थी। पुलिस की कड़ी मेहनत आखिरकार रंग लाई। करीब अड़तालीस दिन बाद 24 जुलाई को टेकराज कर्की नामक शख्स वसंत कुंज थाने पहुंचा। वह महिपालपुर में लगा पोस्टर देखकर आया था। इस पोस्टर में पुलिस ने मृतक की फोटो देकर पहचान की अपील की थी। टेकराज ने इस फोटो की पहचान अपने चचेरे भाई नेपाल निवासी किशन बहादुर कर्की के रूप में की। इस तरह किशन की तो पहचान हो गई, अब तलाश थी कातिल की। पुलिस ने टेकराज को सारे सीसीटीवी दिखाकर किशन के साथ मौजूद शख्स की पहचान करने की कोशिश की। मगर टेकराज उस शख्स को नहीं जानता था।  

टेकराज से बातचीत में पुलिस को पता लगा था कि किशन को शराब पीने की आदत थी। वह टेकराज से डेढ़ दो महीने पहले मिला था। उसने टेकराज को बताया था कि आजकल वह पार्टियों में काम करता है जहां उसे अच्छा खाना और शराब दोनों मिल जाता था। उसी समय वह टेकराज से 250 रुपये लेकर निकला था और तभी से लापता था।

किशन की शिनाख्त होने से पुलिस को जो थोड़ी बहुत उम्मीद जगी थी, टेकराज के बयान ने उस पर पानी फेर दिया।  

लेकिन टेकराज के बयान से पुलिस को एक बात का शक हुआ कि टेकराज के साथ सीसीटीवी नजर में आया शख्स भी शराब पीने का आदी होगा। इसी शक की बीना पर पुलिस बी1 वसंत कुंज सहित कई अन्य ठेकों पर सादी वर्दी में नजर रखने लगी। 7 अगस्त को एक ठेके के पास पुलिस को सीसीटीवी में दिख रहे दूसरे शख्स से मिलता जुलता शख्स दिखा। पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की तो उसकी पहचान एटा निवासी हरवीर सिंह के रूप में हुई। उसने पुलिस को बताया कि वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ पिछले दो तीन महीने से किशनगढ़ में किराए पर रहता था और शराब पीने का आदि था।

पूछताछ में हरवीर ने पुलिस को बताया कि 6 जून को वह अपनी मोटरसाइकिल से रात करीब 8 बजे झाडियों में छिपकर बीयर पी रहा था। उसी समय उसके पास एक शख्स (किशन) पहुंचा और हाथ पैर जोड़कर शराब पीलाने की जिद करने लगा। उसने हरवीर को बताया कि वह वेटर का काम करता है और उसे शराब की आदत है। उसके गिड़गिड़ाने पर हरवीर को उस पर दया आ गई और उसने किशन को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाकर ठेके पर पहुंच गया। वहां हरवीर के पैसे से शराब खरीदी गई। हरवीर के पास उस उसकी गैस कंपनी के 1,70,000 रुपये भी रखे थे। इन पैसों को किशन ने देख लिया था। शराब, लिम्का आदि खरीदकर दोनों आईएलबीएस अस्पताल के पीछे पहुंचे। वहां हरवीर बीयर और किशन शराब पीने लगा। किशन पर नशा हावी होने लगा और अचानक उसने हरवीर को थप्पड़ जड़ दिया। हरवीर अभी कुछ समझ पाता इसके पहले ही किशन ने उसकी जेब में पड़े रुपये भी छीनने की कोशिश की। इसी पर हरवीर ने पहले उसके सिर पर पत्थर मारा। इसके बाद आसपास पड़े ईंट से उसने ताबड़तोड़ किशन पर हमला बोल दिया। किशन जमीन पर गिरा और वहीं मर गया। इसके बाद हरवीर ने उसका मोबाइल निकाला और वहां से मोटरसाइकिल लेकर चल पड़ा। रास्ते में उसने पहले किशन का मोबाइल नाले में फेंका फिर अपने वो सारे कपड़े जिस पर खून के निशान थे। इसके बाद दूसरे दिन उसने कंपनी के पैसे जमा करवाए और एटा चला गया। दो महीने होने के बाद वह दिल्ली आया उसको उम्मीद थी कि मामला शांत हो गया होगा। इसी उम्मीद के साथ शराब की आदत का शिकार हरवीर फिर ठेके पर पहुंचा था लेकिन पुलिस की जाल में फंस गया।

पुलिस ने हरवीर को गिरफ्तार कर लिया। मामले की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। जल्द ही इस मामले में सुनवाई शूरू होगी।     

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