पीएफआई पर नकेल कसने की बड़ी तैयारी !

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नई दिल्ली, इंंडिया विस्तार। पॉपुलर फ्रंड ऑफ इंडिया यानि पीएफआई के खिलाफ जैसे जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है वैसे वैसे नए नए खुलासे भी हो रहे हैं। इसीलिए सरकार ने पीएफआई पर नकेल कसने की बड़ी तैयारी कर ली है। जांच एजेंसियों को कुछ पीएफआई के साथ कुछ सियासी संबंधों की जानकारी मिली है। दावा किया जा रहा है कि आप से जुड़े कुछ बडे नेताओं ने पीएफआई के नेताओं से मुलाकात की। भीम आर्मी के भी नेता पीएफआई से मिले। इन जानकारियों को गृह मंत्रालय के साथ साझा किया गया है। बताया जा रहा है कि आप नेता संजय सिंह पीएफआई के संपर्क में थे। हांलाकि संजय सिंह ने इस तरह की बातों से इंकार किया है।

गृह मंत्रालय ने इस संबंध में विशेष टीम बनी है इसके साथ ही एनआईए और ईडी आदि के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर गृह मंत्रालय ने पीएफआई के बारे में विस्तृत इनपुट भी लिए हैं।

ईडी की जांच में खुलासा-

ईडी सूत्रों के मुताबिक 120.05 करोड़ रुपये 73 ऐसे बैंक खातों में जमा किए गए जो पीएफआई से संबंधित हैं। इनमें 27 खाते सीधे तौर पर पीएफआई के, रिहैब इंडिया फाउंडेशन 9 और 37 निजी खाते हैं। 17 बैंको के इन खातों की गहन जांच शुरू की गई है।

ईडी की जांच में यह भी पता लगा है कि उपरोक्त खातों में ज्यादातर रकम नकद जमा किए गए। पीएफआई को यह नकद रकम मिलने वाले चंदे की रकम से अलग है। जांच में यह भी पता लगा है कि मिलने वाली नकद रकम का एक हिस्सा शाहीन बाग स्थित पीएफआई के मुख्यालय में रखा गया।  ईडी सूत्रों के मुताबिक पीएफआई के लोगों ने देश भर में नकद चंदे की रकम इकट्ठी की औऱ उसे लेकर दिल्ली पहुंचे बाद में यह रकम शाहीन बाग मुख्यालय में रखी गई।

पीएफआई अध्यक्ष

पीएफआई के दिल्ली अध्यक्ष मोहम्मद परवेज अहमद और अन्य लोगों ने नागरिकता कानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों में जमकर हिस्सा लिया।  

पीएफआई के फंडिंग की जांच का दायरा भी बढ़ाकर 8 राज्यों तक कर दिया गया है। इस बीच यूपी पुलिस को 8 करोड़ से ज्यादा रकम की एक ऐसी मनी ट्रैल मिली है जो पीएफआई की गतिविधियों को संदिग्ध बना रही है। आप नेता संजय सिंह और परवेज अहमद के बीच संपर्क निजी मीटींग, फोन कॉल औऱ व्हाट्सएप्प के जरिए जारी थी। पीएफआई के दिल्ली अध्यक्ष उदित राज के संपर्क में भी थे। पीएफआई के दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद भीम आर्मी टॉप-100 नाम से बने व्हाट्स एप्प ग्रुप में भी जुड़े थे।

पीएफईआई जांच

पीएफआई फंडिंग की जांच का दायरा 8 राज्यों तक बढ़ा दिया गया है। दिल्ली,आंध्र प्रदेश,असम,बिहार,केरल, झारखंड,पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश में   पीएफआई की भूमिका औऱ फंडिंग की गहन जांच की जा रही है।

  गौरतबल है कि पीएफआई (PFI) को बैन करने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने गृह मंत्रालय को पहले ही लिखा है।

यूपी पुलिस को मिले सबूत

सीएए के विरोध में उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा के बीच पीएफआई फंडिंग को लेकर चल रही जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एक मनी ट्रेल पकड़ा गया है। जिसमें करीब आठ करोड़ से ज्यादा की रकम दीनी तालीम और समाजसेवा के नाम पर आई है, जो एक नंबर में दर्शायी गई है। बाकी करोड़ों रुपए भी अवैध ढंग से जुटाने की जानकारी सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सभी खातों की जांच कर रहा है। वेस्ट यूपी के कुछ संदिग्ध बैंक खातों में आठ करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम आई है। ज्यादातर रकम एक नंबर में है। जाहिर है कि इस काम में चार्टड अकाउंटेंट की मदद ली गई है। बैंक खातों में करोड़ों की लेनदेन करने वाले इस बात से वाकिफ होंगे कि बाद में खातों की जांच हो सकती है। इसलिए उन्होंने उतना पैसा ही खातों में ट्रांसफर किया है, जो एक नंबर में दिखाया जा सके। हो सकता है कि इससे ज्यादा रकम नकद या हवाला कारोबार के रूप में स्थानीय लोगों तक आई हो।

भड़काऊ पोस्टर

वेस्ट यूपी में पत्थरबाजी करते हुए युवक का पोस्टर सबसे पहले पीएफआई ने जारी किया। कुछ ऐसे पर्चे भी बांटे गए, जिसमें अवैध शस्त्र के साथ युवक दिखाए गए हैं। ये पोस्टर भी पीएफआई ने जारी किए। इन पर्चों पर प्रिंटिंग प्रेस का नाम नहीं लिखा। जानकारी आई है कि दिल्ली के शाहीनबाग में पीएफआई मुख्यालय से भड़काऊ प्रचार सामग्री आसपास के राज्यों को भेजी गई, जिससे सीएए को लेकर हिंसा हुई।

आशंका जताई जा रही है कि पीएफआई से जुड़े लोग दूसरे संगठनों से भी जुड़े हो सकते हैं क्योंकि पीएफआई कोई राजनीतिक संगठन नहीं है। ऐसे में इन लोगों को ट्रेस कर पाना बड़ा मुश्किल है। खुफिया एजेंसियां इस काम में लगी हुई हैं।

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