पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में CAPF सुरक्षा में इस बार किसी तरह के ढ़ील की आशंका नहीं है। कोलकाता मे केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के डीजी मिटिंग में इस बार वन इलेक्शन फोर्स की रणनीति अपनाने पर सहमति हुई है।
सीएपीएफ के अंतर्गत आने वाले सीआरपीएफ , बीएसएफ , सीआईएसएफ , एसएसबी और आइटीबीपी के महानिदेशक एक मंच पर आए और पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 सुरक्षा को लेकर सहमत हुए। इस बैठक में एक लक्ष्य रखा गया-हर मतदाता बिना डरे वोट कर सके।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में क्या है वन इलेक्शन फोर्स की नीति
चुनाव को लेकर आयोजिच डीजी बैठक में सबसे दिलचस्प कॉनसेप्ट वन इलेक्शन फोर्स का रहा। इसके तहत अलग-अलग बलों के बजाय एक संयुक्त कमांड सोच के साथ काम करने की रणनीति पर जोर दिया गया।

सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने साफ कहा कि यह सिर्फ सुरक्षा ड्यूटी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का मिशन है। उन्होंने जवानों को एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। इस रणनीति के तहत एकीकृत कमांड और कंट्रोल को प्राथमिकता दी गई है। इसमें सभी बलों के बीच रियल टाइम समन्वय और संयुक्त ऑपरेशन प्लान शामिल होंगे।
सॉल्ट लेक में बना ‘सिक्योरिटी वार रूम’
महानिदेशक स्तर की यह बैठक कोलकाता के Salt Lake स्थित CRPF के तीसरे सिग्नल सेंटर में यह उच्च स्तरीय बैठक हुई। सीआरपीएफ आईजी Salabh Mathur की अगुवाई में हुए इस सत्र में पश्चिम बंगाल पुलिस, चुनाव आयोग के पुलिस सलाहकार और सभी CAPF यूनिट्स के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
यहां “इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी ग्रिड” को अंतिम रूप दिया गया, जिसमें QRT (Quick Reaction Teams) और एंटी-सबोटाज चेक्स पर खास ध्यान दिया गया।
ऑपरेशनल फोकस: 23 अप्रैल का पहला चरण
Election Commission of India के दिशा-निर्देशों के तहत 23 अप्रैल को 152 सीटों पर पहले चरण का मतदान होना है। इसके लिए हो रही तैयारियों में संवेदनशील इलाकों की हाई सर्विलांस, हर जवान के लिए ‘इलेक्शन ड्यूटी हैंडबुक’ अनिवार्य और ग्राउंड लेवल पर वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी शामिल है।
यह स्पष्ट किया गया कि “लीडरशिप बाय एग्जाम्पल” ही फील्ड में अनुशासन बनाए रखेगी।



