TRAI की AI-आधारित स्पैम ब्लॉकिंग योजना से क्यों घबरा रहे हैं टेलीकॉम ऑपरेटर? सच क्या है

TRAI की AI-आधारित स्पैम ब्लॉकिंग योजना को लेकर टेलीकॉम कंपनियाँ आशंकाएँ जता रही हैं, लेकिन गहराई से देखें तो यह विरोध तकनीकी कमियों से ज़्यादा जवाबदेही से बचने जैसा लगता है।
TRAI की AI आधारित स्पैम कॉल ब्लॉकिंग योजना का कॉन्सेप्ट इमेज
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अगर AI किसी मोबाइल नंबर को स्पैम मानकर तुरंत ब्लॉक कर दे, तो क्या वह ज़्यादा खतरनाक है या वह स्पैम कॉल जो किसी नागरिक की पूरी जमा-पूंजी साफ कर दे?
यही सवाल आज भारत की टेलीकॉम बहस के केंद्र में है, जहाँ TRAI की नई AI-आधारित योजना के खिलाफ ऑपरेटर मोर्चा खोले हुए हैं।

टेलीकॉम ऑपरेटर किस बात से डर रहे हैं?

1. False Positives का डर

ऑपरेटरों का दावा है कि AI गलती से असली ग्राहकों के नंबर भी ब्लॉक कर सकता है।

2. Customer Disruption

बिना शिकायत के सेवा बाधित होने से ग्राहकों में नाराज़गी बढ़ने की आशंका।

3. Operational Burden

छोटे टेलीकॉम ऑपरेटर कहते हैं कि AI सिस्टम लागू करना उनके लिए महँगा और जटिल है।

4. Due Process का तर्क

उनका कहना है कि ब्लॉकिंग केवल उपभोक्ता शिकायतों के आधार पर होनी चाहिए, जबकि वास्तविकता यह है कि स्पैम की रिपोर्टिंग बहुत कम होती है।

AI मनमानी नहीं करता, जोखिम को मापता है

TRAI की योजना “ब्लॉक पहले, सोच बाद में” वाली नहीं है। इसमें

  • रिस्क स्कोरिंग
  • मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन
  • ट्रांजैक्शन पैटर्न एनालिसिस
    शामिल हैं।
    AI यह नहीं कहता कि नंबर दोषी है, वह सिर्फ यह बताता है कि जोखिम कितना है।

यही मॉडल पहले से चल रहा है, फर्क बस इतना है कि अब जवाबदेही होगी

बैंकिंग और UPI सिस्टम पहले ही AI-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन पर चलते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि टेलीकॉम कंपनियाँ खुद भी नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन और मार्केटिंग में AI का इस्तेमाल करती हैं।
तो फिर जब AI उपभोक्ता सुरक्षा के लिए अनिवार्य होता है, तो आपत्ति क्यों?

स्पैम कॉल सिर्फ असुविधा नहीं, सुरक्षा जोखिम है

स्पैम और फ्रॉड कॉल

  • आर्थिक अपराध हैं
  • साइबर सुरक्षा का मुद्दा हैं
  • और कई मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़े हैं

कभी-कभी एक गलत ब्लॉक की असुविधा, हजारों नागरिकों के करोड़ों के नुकसान से कहीं छोटी कीमत होती है।

यह भी पढ़ेंः airtel ai ऐसे भारी पड़ रहा है साइबर क्राइम पर

छोटे ऑपरेटरों का तर्क भी अधूरा है

बड़े ऑपरेटरों के पास पहले से AI इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।
छोटे ऑपरेटरों के लिए TRAI का DIP प्लेटफॉर्म साझा समाधान देता है।
यानी तकनीकी रास्ता मौजूद है, सिर्फ इच्छा की कमी दिखती है।

वैश्विक स्तर पर यह सामान्य नियम है

अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में

  • रोबोकॉल
  • स्पैम कॉल
    AI से ब्लॉक करना अनिवार्य है।
    भारत की योजना कोई प्रयोग नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का विस्तार है।

असली मुद्दा क्या है?

जब सारी तकनीकी दलीलें कमजोर पड़ जाती हैं, तो एक सवाल बचता है:
क्या यह विरोध वास्तव में तकनीक का है या जवाबदेही का?

हकीकत साफ है:

  • AI-flagged ब्लॉकिंग धोखाधड़ी रोकने का जरूरी कदम है
  • असली ग्राहकों के लिए सुरक्षा उपाय मौजूद हैं
  • नागरिकों का भरोसा और सुरक्षा, ऑपरेटरों की असुविधा से कहीं ऊपर है

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15-02-2026