क्या आपको अपने सारे पासवर्ड याद है? आपको भी डर लगता ही होगा कि आपका पासवर्ड कोई चोरी ना कर ले। डिजिटल दुनिया में पासवर्ड याद रखने की झंझट और फ़िशिंग (Phishing) के बढ़ते खतरों के बीच ‘पासकी’ (Passkey) एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में उभरी है। आइए जानते हैं कि पासकी क्या है और यह तकनीक कैसे काम करती है और क्यों आपको तुरंत इस पर स्विच कर लेना चाहिए।
पासकी क्या हैं?
पासवर्ड की जगह तेजी से ले रही पासकी ना केवल सुरक्षित है बल्कि उपयोग में भी आसान है। पासकी कोई अक्षरों या नंबरों की स्ट्रिंग नहीं है, बल्कि यह पब्लिक की क्रिप्टोग्राफी (Public Key Cryptography) पर आधारित है।
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सुरक्षित स्टोरेज: यह आपके डिवाइस (फ़ोन, लैपटॉप या हार्डवेयर की) पर सुरक्षित रूप से स्टोर रहती है।
लॉगिन प्रक्रिया: इसमें पासवर्ड भेजने के बजाय, वेबसाइट या ऐप द्वारा भेजे गए ‘चैलेंज’ पर आपका डिवाइस डिजिटल हस्ताक्षर करता है, जिससे पहचान की पुष्टि होती है।
सरल भाषा में इसमें पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं होती यह आपके डिवाइस (मोबाइल या लैपटॉप) में सुरक्षित रहती है लॉगिन प्रक्रिया में कोई पासवर्ड शेयर नहीं होता वेबसाइट के चैलेंज को क्रिप्टोग्राफिक सिग्नेचर से सत्यापित किया जाता है।

Passkey कैसे शुरू करें?
सबसे पहले अपने अकाउंट में पासकी ऑन करें। Google, Apple या Microsoft अकाउंट सेटिंग्स में जाकर Passkey सक्षम करें। इसके बाद बायोमिट्रिक सेटअप करें। फिंगरप्रिंट, फेस लॉक या PIN को एक्टिव करें।
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इसके बाद क्लाउड सिंक चालू करें ताकि सभी डिवाइस में आसानी से लॉगिन हो सके। संगठनों के लिए पासकी चालू करने के लिए, डेवलपर्स WebAuthn का उपयोग करके Passkey सपोर्ट जोड़ सकते हैं।
Passkey के साथ चुनौतियाँ
सभी वेबसाइट अभी Passkey सपोर्ट नहीं करती इसके अलावा डिवाइस खोने पर रिकवरी की जरूरत पड़ सकती है। सबसे बड़ी बात है कि पासकी क्या है इसको लेकर लोगो में अभी जागरूकता काफी कम है।
अभी Passkey क्यों अपनाएं?
आइए आपको बताते हैं कि अभी पासकी क्यो अपनाएं। तो जानलें कि इसको अपनाते ही फ़िशिंग हमलों से सुरक्षा, पासवर्ड याद रखने की जरूरत खत्म, तेज और आसान लॉगिन और भविष्य की सुरक्षा तकनीक को अपनाने वाले बन जाते हैं आप।
भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच Passkey साइबर धोखाधड़ी को काफी हद तक कम कर सकती है।










