पंडित राम प्रसाद बिस्मिल-19 साल की आयु में शुरू कर दी थी क्रांति

पंडित रामप्रसाद बिस्मिल स्वतंत्रता सेनानियों में से वो नाम है जिसने मात्र 19 साल की आयु में अंग्रेजों से लोहा लेना शुरू कर दिया था।

बिस्मिल की जन्मकुंडली

पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था। पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के पिता मुरलीधर राम भक्त थे, जिसके कारण उनका नाम र से रामप्रसाद रख दिया गया। उनकी माता का नाम मूलमति था।

कहते है की पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जन्मकुंडली को देखकर ज्योतिष ने यह भविष्यवाणी की थी, कि – ” यद्यपि सम्भावना बहुत कम है, किंतु यदि इस बालक का जीवन किसी प्रकार बचा रहा, तो इसे चक्रवर्ती सम्राट बनने से दुनिया की कोई भी ताकत रोक नहीं पाएगी।” हिन्दी की वर्णमाला पढ़ने में बिस्मिल ने बचपन में रूचि नहीं दिखाई जिलके बाद उनकी शुरुआती शिक्षा उर्दू में प्रारंभ की गई। मिडिल स्कूल की परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने के बाद
उन्होंने अंग्रेजी पढ़ना शुरू किया। इसके साथ ही अपने एक पुजारी पड़ोसी द्वारा उन्हें पूजा विधि का ज्ञान प्राप्त हुआ, और उनकी विद्वता का प्रभाव भी बिस्मिल के व्यक्तित्व प पड़ा। उन्होंने अपने जीवन में ब्रम्हचर्य का पालन किया और व्यायाम आदि को अपनाकर बुरी लतों को त्याग दिया। इसके बाद उनका मन पढ़ाई में पहले से बेहतर लगने लगा और वे अंग्रेजी में पांचवे स्थान पर आ गए।

उन्नीस साल की आयु

19 वर्ष की आयु में बिस्मिल ने क्रांति के रास्ते पर अपना पहला कदम रखा। अपने 11 वर्ष के क्रांतिकारी जीवन में उन्होंने कई किताबें भी लिखीं और उन्हें प्रकाशित कर, प्राप्त रकम का प्रयोग उन्होंने हथियार खरीदने में किया। अपने भाई परमानंद की फांसी का समाचार सुनने के बाद बिस्मिल ने ब्रिटिश साम्राज्य को समूल नष्ट करने की प्रतिज्ञा की। मैनपुरी षड्यंत्र में शाहजहांपुर के 6 युवक पकड़ाए, जिनके लीडर रामप्रसाद बिस्मिल थे, लेकिन वे पुलिस के हाथ नहीं लग पाए। इसका षड्यंत्र का फैसला आने के बाद से बिस्मिल 2 साल तक भूमिगत रहे। और एक अफवाह के तरह उन्हें मृत भी मान लिया गया। इसके बाद उन्होंने एक गांव में शरण ली और अपना लेखन कार्य किया।

9 अगस्त, 1925 को लखनऊ के काकोरी नामक स्थान पर देशभक्तों ने रेल विभाग की ले जाई जा रही संगृहीत धनराशि को लूटा। गार्ड के डिब्बे में लोहे की तिजोरी को तोड़कर आक्रमणकारी दल चार हजार रुपये लेकर फरार हो गए। इस डकैती में अशफाकउल्ला, चन्द्रशेखर आज़ाद, राजेन्द्र लाहिड़ी, सचीन्द्र सान्याल, मन्मथनाथ गुप्त, रामप्रसाद बिस्मिल आदि शामिल थे। काकोरी षड्यंत्र मुकदमे ने काफी लोगों का ध्यान खींचा।

सभी प्रकार से मृत्यु दंड को बदलने के लिए की गई दया प्रार्थनाओं के अस्वीकृत हो जाने के बाद बिस्मिल अपने महाप्रयाण की तैयारी करने लगे। अपने जीवन के अंतिम दिनों में गोरखपुर जेल में उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी। 19 दिसंबर, 1927 ई. सोमवार को साढ़े छ: बजे प्रात: काल उन्हे इस शरीर फांसी दे दी गई।

Support India Vistar

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | Chrome में सेव पासवर्ड को ऐसे रखें सुरक्षित, फोन खुला होने पर भी काम आएगा ये सुरक्षा फीचर | ऑनलाइन धमकी, घर पर वसूली ! साइबर ठगी के इस नए तरीके से रहें सावधान | स्पैम कॉल से परेशान हैं? TRAI का यह नया नियम आपके काम का है | crime story: 2006 में पैरोल पर निकली, नाम बदलकर ‘पूजा’ बनी और 20 साल तक पुलिस से बचती रही, आखिर हरिद्वार में कैसे पकड़ी गई साधना? | ड्रंक ड्राइविंग पर अब सिर्फ चालान नहीं, लाइसेंस भी हो सकता है सस्पेंड, दिल्ली में दो मामलों में कोर्ट का आदेश | 91 केस, तीन मामलों में घोषित अपराधी: ग्रेटर नोएडा में छिपे देवा तक ऐसे पहुंची दिल्ली क्राइम ब्रांच | क्या आप जानते हैं कि गूगल का डिजीकवच कैसे आपको फ्रॉड से बचाता है | PM Kisan Verification 2026: यूपी के 15.35 लाख किसानों की किस्त क्यों रुकी? 30 सितंबर की तारीख का सच जानिए | IND vs AFG Asian Games 2026: एक गेंद भी नहीं फेंकी गई, फिर भारत सेमीफाइनल में कैसे पहुंचा? | WhatsApp Investment Scam से कैसे बचें: Fake Trading App और फर्जी निवेश वेबसाइट की पहचान |
03-10-2026