ADM बनकर करता था करोड़ों के सपने पूरे करने का दावा, 60 लाख की ठगी का खुलासा, दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार

सरकारी नौकरी और प्लॉट आवंटन का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये ठगने वाले एक कथित फर्जी ADM को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में करीब 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी और कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।
फर्जी ADM बनकर 60 लाख की ठगी करने के आरोपी को गिरफ्तार करती दिल्ली पुलिस

सरकारी नौकरी और सस्ते दर पर जमीन या प्लॉट दिलाने के नाम पर ठगी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है जो खुद को उत्तर प्रदेश का अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) बताकर लोगों का भरोसा जीतता था और फिर उनसे मोटी रकम वसूल लेता था।

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पुलिस के अनुसार आरोपी ने सरकारी नौकरी लगवाने और सरकारी नीति के तहत नोएडा में प्लॉट आवंटित कराने का भरोसा देकर कई लोगों से करीब 60 लाख रुपये की ठगी की।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

मामले की शुरुआत मार्च 2026 में मिली एक शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि एक व्यक्ति खुद को “वरुण कुमार पांडे, ADM उत्तर प्रदेश” बताता है और वरिष्ठ अधिकारियों से करीबी संबंध होने का दावा करता है।

आरोपी ने सरकारी नौकरी और प्लॉट दिलाने का भरोसा देकर शिकायतकर्ता और उसके परिचितों से बड़ी रकम हासिल कर ली। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

डिजिटल और बैंक रिकॉर्ड से खुला राज

जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट, बैंक खातों और UPI लेनदेन की जांच की। पुलिस को कई ऐसे डिजिटल सबूत मिले जिनसे आरोपी की गतिविधियों का खुलासा हुआ।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लगातार खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करता था और सरकारी तंत्र में अपनी पहुंच होने का दावा करता था।

असली अधिकारी की पहचान का कर रहा था इस्तेमाल

पुलिस जांच में एक अहम तथ्य यह भी सामने आया कि आरोपी एक वास्तविक PCS अधिकारी की पहचान और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों का इस्तेमाल कर लोगों को विश्वास में लेता था।

सत्यापन के दौरान संबंधित अधिकारी से संपर्क किया गया, जिसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी फर्जी पहचान के सहारे लोगों को धोखा दे रहा था।

बरामद हुए फर्जी दस्तावेज और आईडी कार्ड

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कई ऐसे दस्तावेज बरामद किए हैं जो कथित तौर पर उसकी फर्जी पहचान को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।

बरामद सामग्री में ADM नाम से बने विजिटिंग कार्ड, पहचान पत्र, सरकारी दस्तावेजों जैसी दिखने वाली सामग्री, मोबाइल फोन, ऑडियो रिकॉर्डिंग, व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं।

ठगी की रकम से खरीदी कार और स्कूटी

वित्तीय जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड के जरिए धन के प्रवाह का पता लगाया। जांच में एक स्विफ्ट कार और एक स्कूटी की पहचान की गई, जिनके बारे में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि इन्हें ठगी से प्राप्त रकम से खरीदा गया था।

अन्य पीड़ितों की तलाश जारी

पुलिस का मानना है कि इस मामले में और भी लोग पीड़ित हो सकते हैं। जांच एजेंसियां आरोपी के संपर्कों, सहयोगियों और संभावित पीड़ितों की पहचान करने में जुटी हैं।

अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और डिजिटल सबूतों, वित्तीय लेनदेन तथा अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

फर्जी सरकारी अधिकारियों से कैसे बचें?

किसी भी व्यक्ति द्वारा सरकारी नौकरी, प्लॉट आवंटन या सरकारी लाभ दिलाने के बदले धन की मांग की जाए तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से जांच करें। सरकारी नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती हैं और इनके लिए किसी बिचौलिए को भुगतान करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।

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21-07-2026