डॉक्सिंग क्या है? क्या आप doxing से बच सकते हैं?

क्या आप जानते हैं साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार है? डॉक्सिंग क्या है और आप इससे कैसे बच सकते हैं? यह जानकारी होना बहुत जरूरी है।
डॉक्सिंग क्या है

क्या आप जानते हैं साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार है? डॉक्सिंग क्या है और आप इससे कैसे बच सकते हैं? यह जानकारी होना बहुत जरूरी है। साइबर क्रिमिनल डॉक्सिंग का कैसे इस्तेमाल करते हैं इसकी जानकारी हो तो इससे बचाव भी हो सकता है।

डॉक्सिंग क्या है

किसी व्यक्ति की निजी जानकारी को बिना अनुमति सार्वजनिक रूप से उजागर करने का काम डॉक्सिंग कहलाता है। डॉक्सिंग का उद्देश् अक्सर उत्पीड़न, डराना धमकाना या नुकसान पहुंचाना होता है। साइबर क्राइम की दुनिया में इसे गंभीर खतरा माना जाता है।

डॉक्सिंग शब्द की उत्पति ड्रॉपिंग डॉक्स से हुई है। इसके लिए सोशल मीडिया, डायरेक्टरी आदि से व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद इस डेटा को लीक किया जाता है। इसका इस्तेमाल फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट आदि में किया जाता है।

डॉक्सिंग वास्तविक जीवन में पीछा करने, धोखाधड़ी और पहचान चोरी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। डिजिटन अरेस्ट स्कैम करने वाले अक्सर डॉक्सिंग का इस्तेमाल करते हैं। यह तरीका दक्षिण‑पूर्व एशिया और अमेरिका में प्रवासी समुदायों के बीच व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया है।

कानून क्या कहता है

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act, 2023) भले ही “डॉक्सिंग” शब्द का प्रयोग नहीं करता, लेकिन यह व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग—जैसे नाम, पता, फ़ोन नंबर या अन्य पहचानकर्ताओं का बिना अनुमति खुलासा—को सीधे कवर करता है। इस तरह डॉक्सिंग भारत के नए डेटा गोपनीयता कानून के तहत दंडनीय अपराध है।

क्या डॉक्सिंग से आप बच सकते हैं

जी हां, डॉक्सिंग से आपका बचाव हो सकता है। इसके लिए कुछ सावधानियों का होना जरूरी है। सोशल मीडिया पर अपने बारे में न्यूनतम जानकारी साझा करें। अकाउंट सुरक्षा मजबूत करने के साथ साथ दृश्यता सीमित करें।

अपने अकाउंट के लिए मजबूत पासवर्ड और 2FA लागू करें ताकि हैकिंग से बचाव हो सके। निगरानी रखें कि आपका नाम या डेटा ऑनलाइन कहां दिख रहा है। यदि डॉक्सिंग का शिकार हो रहे हों तो तुरंत साइबर पुलिस को शिकायत करें, सबूत सुरक्षित रखें।

जानिए क्या कहता है एक्ट

डिजिटट पर्शनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में डॉक्सिंग को ऐसे बताया गया है। इसमें साफ है कि किसी भी पहचान योग्य डेटा का बिना अनुमति प्रकाशन अवैध है। डेटा संग्रह, प्रोसेसिंग या साझा करने के लिए स्पष्ट सहमति का होना जरूरी होता है।

डेटा उल्लंघन करने वालों पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड को शिकायतों की जांच, डेटा हटाने का आदेश और दंड लगाने का अधिकार प्राप्त है। इसके लिए IT Act, 2000 (धारा 66E – गोपनीयता उल्लंघन) और IPC (धमकी, उत्पीड़न) भी लागू।

डॉक्सिंग की शिकायत

डॉक्सिंग डीपीडीपी एक्ट के तहत अवैध है। इसके लिए आप डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड में शिकायत कर सकते हैं.। इसके अलावा आप 1930 पर कॉल कर सकते हैं। साथ ही https://cyberpolice.nic.in/ पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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13-10-2026