क्या भारत के हज़ारों किलोमीटर लंबे समुद्र तट केवल भौगोलिक सीमाएँ हैं, या वे देश की आर्थिक, ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा की असली रीढ़ भी हैं? इसी सवाल से निकलकर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) 28 जनवरी 2026 को एक ऐसे राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत करने जा रहा है, जो साइकिल के पैडल से लेकर तटीय गाँवों की ज़मीनी बातचीत तक फैला होगा। CISF के इस अभियान की जानकारी बल के डीजी प्रवीर रंजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उनके साथ एडीजी हेडक्वार्टर श्री विजय प्रकाश, एडीजी नॉर्थ श्री सुधीर, एडीजी ए पी एस श्रीमति बिनीता ठाकुर भी मौजूद थे।
वंदे मातरम कोस्टल साइक्लोथॉन-2026 CISF की एक महत्वाकांक्षी और जनभागीदारी आधारित पहल है, जिसका दूसरा संस्करण इस बार और बड़े पैमाने पर आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान न सिर्फ तटीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि समुद्र तटों की सुरक्षा केवल एजेंसियों की नहीं, पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
क्यों ज़रूरी है यह साइक्लोथॉन
भारत के पास 250 से अधिक बंदरगाह हैं, जिनमें लगभग 72 EXIM बंदरगाह देश के करीब 95 प्रतिशत व्यापार को संभालते हैं। तटों पर स्थित रिफाइनरियाँ, शिपयार्ड और परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के अहम स्तंभ हैं। लेकिन इन्हीं क्षेत्रों पर ड्रग्स, हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी, घुसपैठ और संगठित अपराध जैसे जोखिम भी लगातार बने रहते हैं।
पिछले पाँच दशकों से CISF देश के प्रमुख बंदरगाहों और तटीय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में तैनात है। कोस्टल साइक्लोथॉन उसी अनुभव और ज़मीनी समझ का विस्तार है, जिसमें सुरक्षा के साथ संवाद और भरोसे को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है।
कब और कैसे होगा शुभारंभ
28 जनवरी 2026 को मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, नई दिल्ली से गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में इस साइक्लोथॉन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाएंगे। उसी दिन यह अभियान देश के दो छोरों से एक साथ शुरू होगा।
• पश्चिमी तट पर गुजरात के कच्छ स्थित लखपत किले से
• पूर्वी तट पर पश्चिम बंगाल के बक्खाली से
दोनों दिशाओं से चलने वाली CISF की टीमें 25 दिनों की यात्रा के बाद 22 फरवरी 2026 को केरल के कोच्चि में मिलेंगी।
6,553 किलोमीटर का राष्ट्र संवाद
यह साइक्लोथॉन कुल 6,553 किलोमीटर लंबा होगा और भारत के पूरे मुख्य भूमि समुद्र तट को कवर करेगा। रास्ते में सूरत, मुंबई, गोवा, मंगलुरु, हल्दिया, कोणार्क, पारादीप, विशाखापत्तनम, चेन्नई, पुडुचेरी और कन्याकुमारी जैसे प्रमुख तटीय शहर पड़ेंगे।
लेकिन यह सिर्फ दूरी तय करने का अभियान नहीं है। इस यात्रा के दौरान CISF की टीमें 50 से अधिक चयनित तटीय गाँवों में रात्रि विश्राम करेंगी। यहीं स्थानीय मछुआरों, युवाओं और समुदायों के साथ संवाद होगा, उनकी चिंताएँ सुनी जाएँगी और तटीय सुरक्षा में उनकी भूमिका पर बात होगी।
कौन चला रहा है यह अभियान
इस साइक्लोथॉन में CISF के 130 कर्मी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 65 महिला कर्मी भी शामिल हैं। सभी प्रतिभागियों ने एक महीने से अधिक का विशेष प्रशिक्षण लिया है, जिसमें लंबी दूरी की साइक्लिंग, पोषण, सुरक्षा, साइकिल मेंटेनेंस और शारीरिक सहनशक्ति पर फोकस किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान पेशेवर साइकिल चालकों के मार्गदर्शन ने इस अभियान को तकनीकी और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर मज़बूत किया है।
उद्देश्य जो साइकिल से आगे जाते हैं
वंदे मातरम कोस्टल साइक्लोथॉन-2026 का उद्देश्य केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है। यह तटीय समुदायों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच साझेदारी को मजबूत करने, नशीली दवाओं और मानव तस्करी जैसे खतरों के खिलाफ सतर्कता बढ़ाने और युवाओं में फिटनेस व अनुशासन की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास भी है।
साथ ही, यह अभियान भारत की समुद्री विरासत, तटीय परंपराओं और मछुआरा समुदाय के योगदान को सम्मान देने का भी माध्यम बनेगा।


तटीय सुरक्षा में CISF की भूमिका
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ISPS कोड के तहत CISF को बंदरगाह सुरक्षा के लिए मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन के रूप में नामित किया है। वर्तमान में CISF देश के सभी 12 प्रमुख बंदरगाहों सहित पोर्ट ब्लेयर जैसे रणनीतिक बंदरगाहों पर तैनात है। कोस्टल साइक्लोथॉन इसी जिम्मेदारी का जनसंवाद संस्करण है, जो सुरक्षा को जनता से जोड़ता है।
आगे क्या
इस साइक्लोथॉन के साथ CISF का तटीय समुदायों से जुड़ाव यहीं खत्म नहीं होगा। यात्रा के बाद भी तटीय क्षेत्रों में स्थित 47 CISF यूनिट्स के माध्यम से भर्ती, फिटनेस, स्वच्छता और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम लगातार चलते रहेंगे। चयनित तटीय गाँवों में CSR के ज़रिये विकास और कल्याण से जुड़ी पहलों की भी योजना है।







