ऑनलाइन सट्टेबाजी से आया पैसा अगर सीधे किसी बैंक खाते में जमा हो तो जांच एजेंसियों के लिए उसका रास्ता पकड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। लेकिन यही रकम कई कंपनियों, विदेशी निवेश और शेयर बाजार के सौदों से घूमकर वापस आए तो असली स्रोत पहचानना कठिन हो जाता है। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़ी जांच में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने इसी तरह के कथित धन शोधन का आरोप लगाया है।
ED ने EaseMyTrip के सह-संस्थापक निशांत पिट्टी को महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की पूरक चार्जशीट में आरोपी बनाया है। एजेंसी का आरोप है कि अवैध सट्टेबाजी से जुड़े धन को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI के रूप में भारतीय शेयर बाजार में लाने में मदद की गई।
इस मामले में पिट्टी के डीमैट खाते में मौजूद करीब ₹59.60 करोड़ मूल्य के शेयर अस्थायी रूप से अटैच किए गए हैं।
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हालांकि यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि ये ED के आरोप हैं। निशांत पिट्टी ने कहा है कि उन्हें चार्जशीट या अदालत के समन की जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि उनके लेनदेन कानून के मुताबिक हुए हैं और उनकी संपत्तियां वैध आय तथा औपचारिक बैंकिंग माध्यमों से प्राप्त हुई हैं।
आखिर सट्टे का पैसा शेयर बाजार तक कैसे पहुंचने का आरोप है?
यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। सामान्य निवेशक शेयर खरीदता है और भाव बढ़ने पर उसे लाभ होता है। लेकिन ED का आरोप इससे अलग कथित व्यवस्था का है। एजेंसी के अनुसार अवैध बेटिंग से पैदा हुई रकम को कई चरणों से गुजारकर भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी निवेश की शक्ल में लाया गया।
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इसे आसान भाषा में समझें।
पहला चरण: अवैध कमाई
जांच एजेंसी के अनुसार Skyexchange जैसे ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म से बड़ी रकम पैदा हुई।
दूसरा चरण: पैसे की पहचान बदलना
आरोप है कि इस रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय अलग-अलग संस्थाओं और विदेशी कंपनियों के रास्ते घुमाया गया। मनी लॉन्ड्रिंग की भाषा में रकम को कई परतों से गुजारने की ऐसी प्रक्रिया को अक्सर “लेयरिंग” कहा जाता है।
तीसरा चरण: विदेशी निवेश का रास्ता
ED का आरोप है कि रकम को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI के रूप में भारतीय इक्विटी बाजार में लाया गया। इससे पैसा सामान्य विदेशी निवेश जैसा दिखाई दे सकता है।
चौथा चरण: शेयरों के सौदे
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि Easy Trip Planners Ltd. के शेयर मूल्य और बाजार पूंजीकरण को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए पहले से तय सौदे की व्यवस्था की गई।
इस तरह जांच का असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पैसा कहां से आया। सवाल यह भी है कि शेयर बाजार में पहुंचने से पहले पैसा किन रास्तों से गुजरा और निवेश करने वाली विदेशी संस्थाओं के पीछे कौन था।
निशांत पिट्टी पर ED ने क्या आरोप लगाए हैं?
ED की चार्जशीट में निशांत पिट्टी को दुबई स्थित हरी शंकर तिबरेवाल का करीबी सहयोगी बताया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक तिबरेवाल कथित अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म Skyexchange से जुड़ा था।
ED का आरोप है कि पिट्टी ने तिबरेवाल से जुड़े एक सहयोगी के साथ Easy Trip Planners के शेयरों को लेकर पहले से तय व्यवस्था में भूमिका निभाई। इसका कथित उद्देश्य शेयर की कीमत और कंपनी के बाजार पूंजीकरण को कृत्रिम रूप से बढ़ाना था।
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि इसके बाद तिबरेवाल से जुड़ी विदेशी संस्थाओं के माध्यम से निवेश किया गया।
₹59.60 करोड़ के शेयर क्यों अटैच किए गए?
ED ने PMLA यानी धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत निशांत पिट्टी के डीमैट खाते में मौजूद करीब ₹59.60 करोड़ मूल्य के शेयर अस्थायी रूप से अटैच किए हैं।
जांच एजेंसी ने इन शेयरों को कथित “अपराध की आय” से जोड़ा है और अदालत से इन्हें जब्त करने की अनुमति मांगी है।
यहां अटैचमेंट और अंतिम जब्ती में अंतर समझना जरूरी है। अस्थायी अटैचमेंट जांच की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। आरोपों और संपत्ति के संबंध पर अंतिम न्यायिक फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद होता है।
क्रिकेट सीरीज का कनेक्शन क्यों आया?
इस जांच में एक दिलचस्प कड़ी 2022 की क्रिकेट सीरीज से भी जुड़ी है।
ED ने EaseMyTrip और Skyexchange द्वारा भारत में एक क्रिकेट सीरीज के सह-प्रायोजन का उल्लेख किया है। एजेंसी इसे दोनों पक्षों के बीच कथित परिचालन संबंध दिखाने वाले साक्ष्यों में शामिल कर रही है।
दूसरी तरफ EaseMyTrip पूर्व में महादेव बेटिंग ऐप या किसी बेटिंग प्लेटफॉर्म से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध से इनकार कर चुकी है।
कितना बड़ा बताया जा रहा है Mahadev Betting App Network?
ED के मुताबिक महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े नेटवर्क ने 2019 से करीब ₹80,000 करोड़ की कथित अपराध आय पैदा की। जांच एजेंसी के अनुसार Skyexchange से करीब ₹12,000 करोड़ की अपराध आय पैदा होने का अनुमान है।
महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल बताए जाते हैं।
मामले में ED अब तक 14 लोगों की गिरफ्तारी, करीब ₹1,885 करोड़ की संपत्तियों को अटैच करने और छह चार्जशीट में 116 आरोपियों को नामजद करने की जानकारी दे चुकी है।
आम निवेशक के लिए इस मामले में क्या सबक है?
यह मामला ऑनलाइन बेटिंग तक सीमित नहीं है। इसका दूसरा पहलू शेयर बाजार और निवेशकों से जुड़ा है।
किसी शेयर की कीमत अचानक बढ़ने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि कंपनी के कारोबार या मुनाफे में उसी अनुपात में सुधार हुआ है। बाजार में कृत्रिम खरीद-बिक्री, आपस में जुड़े खातों के सौदे या दूसरे तरीकों से किसी शेयर की कीमत प्रभावित करने के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
इसलिए किसी शेयर में सिर्फ तेजी देखकर पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
निवेशक को कंपनी के नतीजे, प्रमोटर हिस्सेदारी, एक्सचेंज को दी गई सूचनाएं, असामान्य ट्रेडिंग वॉल्यूम और नियामकीय कार्रवाई जैसी जानकारियां भी देखनी चाहिए।
FPI क्या है और इसका नाम इस केस में क्यों आया?
FPI का मतलब Foreign Portfolio Investment है। इसके तहत विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों के शेयर और दूसरी वित्तीय संपत्तियों में निवेश कर सकते हैं।
FPI अपने आप में पूरी तरह वैध निवेश व्यवस्था है।
इस मामले में सवाल FPI व्यवस्था पर नहीं बल्कि ED के उस आरोप पर है जिसमें कहा गया है कि कथित अवैध बेटिंग की रकम को विदेशी निवेश के रूप में दिखाकर भारतीय शेयर बाजार में लाया गया।
यही अंतर महत्वपूर्ण है। किसी वैध वित्तीय माध्यम का कथित तौर पर अवैध रकम की पहचान छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जाना मनी लॉन्ड्रिंग जांच का विषय बन सकता है।
पिट्टी ने क्या कहा?
निशांत पिट्टी ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें किसी चार्जशीट की जानकारी नहीं है और संबंधित अदालत से उन्हें समन नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि वे जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करते रहे हैं और आगे भी करेंगे। उनका दावा है कि उनके सभी लेनदेन लागू कानूनों के मुताबिक हैं और उनकी संपत्तियां वैध आय तथा औपचारिक बैंकिंग माध्यमों से हासिल की गई हैं।
इसलिए इस मामले को पढ़ते समय ED के आरोप और आरोपी पक्ष के जवाब, दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है। अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया से तय होगा।
ऑनलाइन बेटिंग से शेयर बाजार तक, जांच का बड़ा सवाल
महादेव बेटिंग ऐप मामले की यह कड़ी बताती है कि ऑनलाइन अपराध से कमाए गए धन की जांच अब बैंक खाते या नकद लेनदेन तक सीमित नहीं रह गई है।
विदेशी कंपनियां, FPI, डीमैट खाते और शेयर बाजार के सौदे भी जांच की कड़ी बन सकते हैं।
आम आदमी के लिए सबसे उपयोगी बात यही है कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म से दूरी रखें और शेयर बाजार में अचानक तेजी दिखाने वाले किसी शेयर में सिर्फ सोशल मीडिया टिप, मैसेज या प्रचार देखकर निवेश न करें।










