धारा 370 हटने के बाद इस तरह बदल रहा है जम्मू काश्मीर का आर्थिक परिदृश्य

आलोक वर्मा

नई दिल्ली, आलोक वर्मा। धारा 370 हटने के बाद जम्मू काश्मीर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी चाहे जो हो रही हो लेकिन यथार्थ बहुत सुखद है। गृह मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ो के नजरिए से देखें तो वित्त वर्ष 2019-20 में 18.34 लाख मीट्रीक टन सेब घाटी से बाहर भेजे गए हैं। सरकार की बाजार योजनाओं, प्रधानमंत्री विकास पैकेज आदि का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है।

नाफेड के माध्यम से काश्मीर घाटी में 70. 45 लाख करोड़ मूल्य के सेब सीधे उत्पादकों से खरीदे गए हैं। सरकार का मानना है कि जम्मू काश्मीर और लद्दाख की पूर्ण आर्थिक शक्ति का इस्तेमाल पिछले 70 सालों से हो ही नहीं पा रहा था। क्योंकि जम्मू काश्मीर के लोग पिछले कई दशकों से आतंकी हिंसा और अलगाववाद से पीड़ित रहे हैं। सीमा पार से प्रयोजित विघटनकारी साजिशें विकास में बाधक तो थी हीं आर्थिक क्षमता का पूरा इस्तेमाल भी नहीं होने दे रही थीं।

अनुच्छेद 35A और कुछ अन्य संवैधानिक अस्पष्टताओं के कारण इस क्षेत्र के लोग संवैधानिक अधिकारों से वंचित रहे हैं। असल में उन्हें देश के अन्य हिस्सों में नागरिकों को मिलने वाले विभिन्न केन्द्रीय कानूनों का लाभ नहीं मिल पा रहा था। सरकार ने जम्मू और कश्मीर सरकार की सूचना के हवाले घाटी में कृषि कार्य सुचारु रूप से चलने का दावा किया है। आंकड़ो के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 (जनवरी, 2020 तक) के दौरान 18.34 लाख मीट्रिक टन ताजे फल (सेब) घाटी से बाहर भेजे गए हैं।

सितंबर 2019 में भारत सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली बाजार योजनाओं के तहत बागवानी क्षेत्र में पहली बार 70.45 करोड़ रुपये की कीमत के 15769.38 मीट्रिक टन सेबों की खरीद की गई। यह खरीद 28 जनवरी, 2020 तक की है, जिसे नाफेड के जरिए कश्मीर घाटी में सीधे सेब उत्पादकों से खरीदा गया है। इस योजना को 31 मार्च, 2020 तक विस्तार दिया गया है। वर्ष 2019 में मधुमक्खी पालन क्षेत्र में 813 मीट्रिक टन कच्चे रेशम के कोवे का उत्पादन दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तीन तिमाहियों के दौरान 688.26 करोड़ रुपये की हस्तशिल्प सामग्री का निर्यात किया गया। पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए कई अभियान भी शुरू किए गए हैं।
जम्मू और कश्मीर सरकार ने सूचित किया है कि भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा किए जाने वाले सामयिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु समूह के लोगों के संबंध में श्रमिक आबादी औसत 51 प्रतिशत है।
80,068 करोड़ रुपये वाले प्रधानमंत्री विकास पैकेज -2015 के तहत सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि, बागवानी, कौशल विकास क्षेत्र आदि में प्रमुख विकास परियोजनाएं पहले से ही कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। भारत सरकार द्वारा वैयक्तिक लाभार्थी केंद्रित योजनाओं सहित कई प्रमुख योजनाएं जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के विकास के लिए कार्यान्वित की जा रही हैं।

कुल मिलाकर जम्मू काश्मीर से 370 के हटने के बाद केंद्र सरकार की योजनाओं ने जम्मू काश्मीर की कृषि और पर्यटन की संभावनाओं को सकारात्मक आधार दे दिया है। यही वजह है कि राज्य का आर्थिक परिदृश्य बदलने की शुरूआत हो चुकी है।

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Alok Verma
a senior journalist with a 25 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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