यूं तय हो सकता है बॉल ब्वाय से गोल्ड मेडलिस्ट तक का सफऱ

रायपुर। नाम है खिरमन तांडी। अरे वही छतीसगढ़ के खिरमन जो ऑल इंडिया लांग टेनिस चैंपियनशिप अंडर 14 की श्रेणी में गोल्ड मेडल हासिल कर चुका है। अब तक 18 ट्रॉफियों को अपने नाम कर चुके खिरमन की कहानी सुनेंगे तो दांतो तले उंगली दबा लेंगे। मतलब ये है कि विश्व खेल दिवस पर खिरमन की चर्चा किए बिना बात हजम नहीं होगी।   

तो खिरमन की कहानी पहले संक्षेप में बता देते हैं। खिरमन पहले शहर के टेनिस ग्राउंड में जाकर टेनिस के बॉल उठाया करता था। यानि आप कह सकते हैं बॉल ब्वाय का काम करता था। इसके बदसे मिल जाते थे सप्ताह में सौ रूपल्ली।

दरअसल खिरमन तांडी कभी अपने पिता और टेनिस ग्राउंड के केयर टेकर जय तांडी के साथ टेनिस ग्राउंड जाया करते थे हसरत होती थी टेनिस खेलते हुए बच्चों को देखना। हसरत पूरी भी हो रही थी। धीरे धीरे बॉल ब्वाय का काम भी मिलने लगा और सप्ताह में सौ रूपये भी आ गए। लेकिन मुकाम ये तो था नहीं इसलिए खिरमन टेनिस खेल की तरफ हमेशा ललचाई नजर से देखा करता। खिरमन की इस नजर को पहचान लिया कोच लॉरेन सेंटियागो ने बस फिर क्या था। दूसरे बच्चों की तरह उन्होंने ख़िरमन को भी काफी सिखाया और इसके बदले कभी फीस नहीं ली बल्कि उसे टेनिस कीट भी गिफ्ट की। हर रोज सुबह 6:30 से लेकर 9:30 बजे तक और शाम के स्कूल से आने के बाद शाम के 5:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खिरमन प्रैक्टिस करते हैं । यही नहीं  बहुत कम समय में खिरमन ऑल इंडिया लॉन टेनिस चैंपियनशिप में अंडर 14 केटेगरी में गोल्ड मेडल हासिल किया है । साथ ही अपनी दमदार परफॉर्मेंस से लॉन टेनिस में अब तक 18 से ज्यादा ट्राफी अपने नाम करा चुके हैं।  नवमी क्लास में  पढ़ रहे खिरमन के पिता जय कुमार तांडी नगर निगम में सफाई कर्मचारी हैं। इसके अलावा वे इस ग्राउंड में केयरटेकर का काम भी करते हैं। ख़िरमन के फेवरेट खिलाड़ी फेडरल है और वे हमेशा उन्हीं को देखकर देश विदेश में टेनिस की दुनिया में अपना नाम बनाना चाहते हैं । दूसरी ओर उनके कोच लारेंस सेंटियागो का भी मानना है कि ख़िरमन में टेनिस को लेकर जबरदस्त दीवानगी है साथ ही स्किल की ऐसी समझ है कि अच्छे-अच्छे खिलाड़ी इनसे नहीं जीत पाते हैं। 

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