कौऔं को दिए गए भोजन से ही पितर होते हैं तृप्त जाने क्यों

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श्राद्ध की पूजा में पितरों को भोजन निकालते वक्त एक ग्रास कौवे का निकलते हुए आपने कई बार देखा होगा।जानते हैं ऐसा क्यों करते हैं दरअसल शास्त्रों के मुताबिक कौवे जिस भोजन को लेते हैं वही भोजन पितरों को प्राप्त होताहै औऱ उन्हें तृप्ति मिलती है।

श्राद्ध पक्ष में पितरों के अलावा ब्राह्मण, गाय, श्वान और कौवे को भोजन दिया जाता है। गाय में सभी 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए वह अत्यंत पवित्र और पूजनीय होती है। श्वान और कौवे को पितर का रूप माना जाता है। इसलिए उन्हें ग्रास देने का विधान है। भारत के अलावा दूसरे देशों की प्राचीन सभ्यताओं में भी कौवे को महत्व दिया गया है। गरुड़ पुराण में बताया है कि कौवे यमराज के संदेश वाहक होते हैं। श्राद्ध पक्ष में कौएं घर-घर जाकर खाना ग्रहण करते हैं, इससे यमलोक में स्थित पितर देवताओं को तृप्ति मिलती है। ग्रीक माइथोलॉजी में रैवन (एक प्रकार का कौवा) को अच्छे भाग्य का संकेत माना गया है। वहीं, नोर्स माइथोलॉजी में दो रैवन हगिन और मुनिन की कहानी मिलती है, जिन्हें ईश्वर के प्रति उत्साह का प्रतीक बताया गया है।

धर्म शास्त्र श्राद्ध परिजात में वर्णन है कि पितृपक्ष में गौ ग्रास के साथ काक बलि के बिना तर्पण अधूरा है। मृत्यु लोक के प्राणी द्वारा काक बलि के तौर पर कौओं को दिया गया भोजन पितरों को प्राप्त होता है।

मान्यता है कि पृथ्वी पर जब तक यमराज रहेंगे तब तक कौआ का विनाश नहीं हो सकता है। अगर किसी वजह से कौओं का सर्वनाश हो जाता है काक बलि की जगह गौ ग्रास देकर पितरों की प्रसन्नता की जा सकती है। गौ माता को धर्म का प्रतीक माना जाता है। धर्म प्रतीक के दिव्य होने पर पितरों की प्रसन्नता के लिए सार्थक माना जाता है।

कौआ यमस्वरूप है। वह यमराज का पुत्र एवं शनिदेव का वाहक है। उसके आदेश से देह त्यागने के बाद लोग स्वर्ग और नरक में जाते हैं। बाल्मिकी रामायण के काम भुसुंडी में यह वर्णन मिलता है। उल्लेख है कि कौआ एक ब्राह्मण है। वह गुरु के अपमान के कारण श्रापित हो गया था। तब मुनि के शाप से वह चांडांल पक्षी कौआ हो गया। इसके बावजूद वह भगवान श्रीराम का स्मरण करता रहा।

श्रीरामचरित मानस में इस प्रसंग का उल्लेख है। यमराज से काक भुसुंडी को दूर प्रस्थान दिव्य टैलीपैथी का गुण हासिल है। वह किसी भी शुभ-अशुभ की पूर्व सूचना सबसे पहले दे देता है। मान्यता है कि किसी अतिथि के आगमन के पूर्व सूचना सबसे पहले कौओं के शब्दवाण से मिलती है। श्राद्ध पारिजात में वर्णन है कि यमराज अपने पुत्र कौओं के द्वारा मृत्युलोक के शुभ एवं अशुभ संदेश को प्राप्त करते हैं।

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