दिनदहाड़े हत्या से जंगलों तकः रचना यादव मर्डर केस में तह तक कैसे पहुंची पुलिस

गवाही से पहले एक महिला की दिनदहाड़े हत्या ने दिल्ली को हिला दिया था। अब इस हत्याकांड के पीछे की साजिश, आरोपी और पुलिस की रणनीति सामने आई है।
रचना यादव हत्याकांड में पकड़े गए आरोपी, पुलिस टीम और स्पेशल सीपी प्रैस कांफ्रेंस
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क्या आपने सुना है कि कई सीसीटीवी और फोन नंबरों के बाद भी कोई केस ब्लाइंड हो सकता है। दिल्ली का रचना यादव हत्याकांड इसका जीता जागता प्रमाण है। मगर दिल्ली पुलिस ने इसे कैसे सुलझाया यह भी कम दिलचस्प नहीं। कैसे दिल्ली पुलिस ने एआई की मदद हत्याकांड के आरोपियों को पकड़ने में ली जानिए इस पूरी कहानी में।

वीडियो क्लिक कर स्पेशल सीपी रविन्द्र यादव से सुनें पूरी कहानीः

क्या है रचना यादव हत्याकांड

10 जनवरी 2026 की सुबह शालीमार बाग में सब कुछ सामान्य लग रहा था। लोग अपने काम में व्यस्त थे, पार्क में आवाजाही थी। तभी कुछ सेकेंड में सब बदल गया। एक महिला पर बेहद करीब से गोली चली और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

यह कोई आम हत्या नहीं थी। मृतका थीं रचना यादव, स्थानीय RWA की अध्यक्ष और एक ऐसे केस की अहम गवाह, जिसकी गवाही किसी की किस्मत तय करने वाली थी।

मौके पर हत्या, कोई चश्मदीद नहीं

सुबह करीब 10:30 बजे PCR को सूचना मिली कि BC ब्लॉक, शालीमार बाग में एक महिला को गोली मार दी गई है। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो महिला जमीन पर औंधे मुंह पड़ी थी। सिर में गोली का निशान था। पास ही खाली कारतूस और गोली का टुकड़ा मिला।

कोई चश्मदीद नहीं। कोई पहचान नहीं। केस उसी वक्त ब्लाइंड मर्डर बन चुका था।

कौन थीं रचना यादव

रचना यादव, अपने पति स्वर्गीय बिजेंद्र यादव की हत्या के बाद से न्याय की लड़ाई लड़ रही थीं। वह न केवल केस को आगे बढ़ा रही थीं, बल्कि अदालत में गवाही देने वाली प्रमुख गवाह भी थीं।

यही बात किसी को नागवार गुजर रही थी।

बनी लंबी चौड़ी टीम

स्पेशल सीपी रविंद्र यादव के मुताबिक मामला बेहद संजीदा था इसलिए रंजीत ढाका, ACP ऑपरेशंस सेल और राजबीर लांबा ACP शालीमार बाग की देखरेख में कई टीमें बनाई गईं, जिनका पूरा सुपरविजन भीष्म सिंह, एडिशनल CP/नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट और विजय सिंह, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, नॉर्दर्न रेंज ने किया। एडिशनल CP/रोहिणी राजीव रंजन की टीमों ने भी अलग-अलग जगहों पर छापे मारने में योगदान दिया। लगभग एक दर्जन बैकअप और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट टीमों के अलावा चार मुख्य टीमें थीं।

टीम-I, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर सोमवीर सिंह I/C स्पेशल स्टाफ और विनोद मीना (UT) IPS कर रहे थे, उसमें SI सुमित काल्कल, SI मुक्ता शर्मा, SI विश्व प्रताप, SI राजेश पिलानिया, SI अजय, SI सपन, ASI सोमवीर, ASI मनोज, ASI रंजीत, HC सुरेश, HC नवीन नरवाल, HC राजेश, HC सचिन छिकारा, HC हरीश, HC नरशी, HC जोगेंद्र, HC पंकज गुप्ता और Ct. ओंबीर शामिल थे।

टीम-II, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर जितेंद्र तिवारी I/C AATS-NWD और श्री आकाश अग्रवाल (UT) DANIPS कर रहे थे, उसमें SI रवि सैनी, ASI विनोद, HC परमजीत, HC परविंदर, HC परवीन, Ct. शुभम, Ct. ओम प्रकाश, Ct. उत्तम, Ct. करण, Ct. सागर और W/HC ममता शामिल थे।

टीम-III, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर राम पाल SHO/शालीमार बाग और श्री नोविन कुमार छेत्री (UT) DSP सिक्किम पुलिस कर रहे थे, उसमें Inspr. मनोज, Inspr. मंतोष, SI अभय सिंह, SI जोगेंद्र जून, SI धीरज सिंह, HC जितेंद्र, HC लीला राम, HC साधुराम, HC संजय, Ct सुभाष और Ct ओम प्रकाश शामिल थे। टीम-IV, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर अमित दहिया I/C स्पेशल स्टाफ रोहिणी कर रहे थे, उसमें SI सुशील, ASI रूपेश, ASI सुरेश और Ct. विक्की शामिल थे।

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शक की सुई पुराने दुश्मन पर

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस की नजरें एक नाम पर टिकने लगीं — भारत यादव। वह बिजेंद्र यादव की हत्या के मामले में फरार था और रचना यादव की प्रस्तावित गवाही से उसकी मुश्किलें बढ़ने वाली थीं।

पुलिस को यहीं से साजिश की पहली परत दिखने लगी।

CCTV, तकनीक और AI की भूमिका

इलाके के सैकड़ों CCTV फुटेज खंगाले गए। भागने के रास्तों को मैप किया गया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल मूवमेंट का विश्लेषण हुआ।

AI आधारित इमेज एनहांसमेंट से दो संदिग्धों की तस्वीरें उभरकर सामने आईं। एक चेहरा बार-बार कैमरों में दिख रहा था — निखिल

जंगलों तक पीछा

तकनीकी इनपुट और गुप्त सूचना पुलिस को दिल्ली से बाहर ले गई। छापेमारी पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और आखिरकार बिहार तक पहुंची।

कटिहार जिले के एक जंगलनुमा इलाके में बनी झोपड़ी से पुलिस ने भारत यादव और निखिल को दबोच लिया। कुछ ही घंटों बाद तीसरा आरोपी सुमित भी हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया गया।

किसने क्या किया

पूछताछ में पूरी साजिश सामने आ गई:

  • भारत यादव ने हत्या की योजना बनाई
  • निखिल ने गोली चलाई
  • सुमित ने बाइक चलाकर फरारी में मदद की

हत्या के बाद इस्तेमाल की गई बाइक को जानबूझकर रोहिणी में छोड़ दिया गया था, ताकि पुलिस गुमराह हो जाए।

आगे क्या

पुलिस का कहना है कि रचना यादव हत्याकांड में कुछ और संदिग्धों से पूछताछ जारी है। पूरे नेटवर्क और मददगारों की भूमिका की जांच अभी बाकी है।

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12-02-2026