शरजील इमाम आरोप मुक्त होने के बाद भी इसलिए जेल से बाहर नहीं आ सकता जानिए पूरी बात

शरजील इमाम को जामिया हिंसा मामले से जुड़े एक मामले में बड़ी राहत मिलने के बाबजूद फिलहाल वो जेल से (न्यायिक हिरासत) बाहर नहीं आ सकता है ,उसके खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल द्वारा दर्ज मामला बेहद संगीन है , उसी मामले में फिलहाल वो बंद है।

पीएफआई कनेक्शन (PFI) सहित कई अन्य आरोपों के साथ दिल्ली पुलिस ने दायर किया था आरोपपत्र

साल 2019 में जब नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध प्रदर्शन के वक्त जामिया यूनिवर्सिटी के बाहर और शाहीनबाग इलाके में चल रहे प्रदर्शन के दौरान शरजील इमाम पोपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI ) के कई संदिग्ध आरोपियों के संपर्क में था और वो इस संस्था का सहारा लेते हुए एक विशेष धर्म संप्रदाय से जुड़े हजारों लोगों को बरगलाने की कोशिश में जुटा हुआ था , इसके साथ ही वो देश में कई राज्यों में शुरू होने वाले आंदोलन के दौरान चक्का जाम और बडे स्तर का विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में था ।

दिल्ली पुलिस की एसआईटी द्वारा दिल्ली दंगा मामले में तफ्तीश के दौरान मिले सबूतों के आधार पर 30 अगस्त 2020 को एक और आरोपपत्र दिल्ली स्थित स्थानिय अदालत में दायर किया गया , दायर हुए इस नए आरोपपत्र के मुताबिक जेएनयू छात्र शरजील इमाम के बारे में कई महत्वपूर्ण सबूतों के आधार पर कई संगीन आरोप लगाए गए हैं , दिल्ली पुलिस के मुताबिक शरजील इमाम पूरे देश में एक बड़ा मुहिम चलाते हुए नागरिकता संशोधन कानून (CAA ) की नाम पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की शुरूआत करने की फिराक में था , उसे इस बात का भी आभास था की इससे वो देश भर में काफी चर्चित युवा नेता बन जाएगा । लिहाजा मामले की गंभीरता को देखते हुए शरजील के खिलाफ राजद्रोह का आरोप लगाते हुए कई और संगीन धाराओं के बारे में आरोपपत्र में विस्तार से कोर्ट को जानकारी प्रदान की गई थी ।
शरजील के खिलाफ क्या – क्या है आरोप ?

दिल्ली पुलिस द्वारा साल 2020 में दायर आरोपपत्र के मुताबिक शरजील इमाम अपने आप को इस हंगामा और विरोध प्रदर्शन के मुताबिक एक बड़ा नेता बनाने के लिए खुद से कई बैठक करने लगा और नार्थ इस्ट दिल्ली सहित पूर्वी दिल्ली के कई मस्जिदों और मौलवियों के साथ बातचीत करने लगा और गलत बयानी करके और सीएए को गलत तरीके से पेश करकर उसका दुस्प्रचार करने लगा , जिससे उस वक्त ये मसला और ज्यादा खराब होने लगा था। इस दौरान शरजील के साथ उसका एक बेहद करीबी मित्र कासिफ भी रहा , जामिया सहित नार्थ इस्ट दिल्ली में और निजामु्द्दीन इलाके में जाकर सीएए विरोधी पर्चे भी खुद जाकर बांटे थे। इस मामले में दिल्ली पुलिस की टीम ने शरजील इमाम सहित कई अन्य आरोपियों के दर्ज बयान को और कई आरोपियों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को आधार बनाया गया था , इसी के आधार पर दिल्ली पुलिस ने इस नए आरोपपत्र में शरजील के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम ) अधिनियम सहित देश विरोधी कार्यों को अंजाम देना , देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हुए दो धर्म संप्रदाय के लोगों को आपस में लड़वाने या आपस में कलह करवाने के लिए भाषण देते हुए अफवाह फैलान और देश की अखंडता और एकता को नुकसान पहुंचाने के आरोप में तमाम सबूतों के आधार पर ये प्रमुख तौर पर आरोप लगाए गए हैं ।

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