chaitra navratri 2025 पर देश भर में विशेष पूजा अर्चना होती है। सहरसा स्थि गायत्री शक्तिपीठ में chaitra navratri 2025 का विशेष पूजन खास तरीके से किया गया। इस अवसर पर chaitra navratri 2025 पर पूजा के महत्व को भी समझाया गया। गायत्री शक्तिपीठ के अरुण कुमार जायसवाल ने लोगों को विशेष अर्थ के बारे में विस्तार से बताया।
इस अवसर पर डाक्टर अरुण कुमार जायसवाल ने नवरात्र के संबंध में कहा-इस समय अंतरिक्ष से विशेष उर्जा धरती पर आती है। इस समय की गई कोई भी साधना विशेष फलदायी होती है। नवरात्रि साधना बस वैसे ही है जैसे इंसान नौ महीना मां के गर्भ में रहकर जीवन का निर्माण करता है,उसी तरह यह नौ दिन जगन्नमाता की गोद में रहकर जीवन का पुनर्निर्माण करता है।


उन्होंने कहा कि मां की गोद में रहने का एहसास घनीभूत हो,यह नवरात्रि काल की साधना का मर्म है। भक्त भगवती का अंश है,यह एहसास भक्त और भगवती के संबंध को प्रगाढ करता है। नवरात्रि साधना को उस मां की गोद का एहसास करते चलें,इन नौ दिनों में आदिशक्ति जगन्नमाता के नौ रुपों का ध्यान का ध्यान करते चलें और मां के गोद के अधिकारी बनते चलें।
उन्होंने कहा कि इस अहसास के लिए बच्चा बनना पडेगा,अहम शून्य बनना होगा। शुक्लपक्ष प्रतिपदा के संबंध में उन्होंने कहा-आज चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा है। आज के दिन से हीं ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण शुरू किया था। नया संवत्सर आज से शुरू हुआ। उन्होंने कहा-नये वर्ष का उत्साह,विक्रम संवत का हमारे अंतर्मन में होना चाहिए। इस अवसर पर माँ शैलपुत्री का विशेष पूजन हुआ।
शक्तिपीठ में इस अवसर पर करीब 300 से ज्यादे परिजन 24000 गायत्री मंत्र जप का संकल्प लिए। अनुष्ठान की पूर्णाहुति 6 अप्रैल को होगी और उसी दिन रामनवमी मनाई जायेगी। कर्मकांड शक्तिपीठ की देव कान्या-मनीषा,स्वर्णा,तथा सृष्टि ने करवाया तथा मुख्य यजमान सुबोध भगत सपत्नीक ने कलश पूजन किया ।
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