वाराणसी पुलिस का ऑपरेशन “दस्तक” एक सप्ताह में 13 सौ से अधिक बदमाशों का सत्यापन

आलोक वर्मा

वाराणसी पुलिस की नायाब योजना दस्तक शुरू हुए एक स्पातह हो चुका है। वाराणसी पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश की परिकल्पना दस्तक हाईटेक बदमाशों पर नकेल कसने के लिए शुरू की गई है। बदमाशों पर डिजिटल नकेल कसने की इस नायाब योजना ने रफ्तार पकड़ लिया है। इस योजना के तहत एक सप्ताह में 1365 छोटे बड़े बदमाशों का सत्यापन कर लिया गया है।

इनमें सर्वाधिक 582 चोर बदमाश हैं। इसके अलावा 562 वाहन चोर, 497 नकबजन, 332 गैंगस्टर, 350 लूट, 149 हत्या, 47 डकैत, 5 फिरौती के लिए अपहरण, 6 सर्राफा लूट, 143 चेन स्नैचिंग, 5 टप्पेबाज जैसे बदमाशों का सत्यापन भी किया जा चुका है।

क्यों है अहम

ए सतीश गणेश

बदमाशों का सत्यापन किसी भी शहर की कानूनी आबोहवा के लिए बहुत जरूरी होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर मामलो में पुराने बदमाश ही लिप्त पाए जाते हैं। पुलिस की निगरानी का अभाव उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान करता है। जुर्म में शामिल बदमाशों का सत्यापन यानि उनकी गतिविधियों की जांच कैसे हो रही है इस पर बहुत कुछ निर्भर करता है। वाराणसी पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने बदमाशों की जांच के लिए कुछ अलग तरीके से सोचा औऱ उसे नाम दिया दस्तक का। इसके तहत हाइटेक अपराधियों पर डिजिटल नकेल कसने की कोशिश हो रही है। दस्तक के तहत 5 साल से जरायम की दुनिया से नाता रखने वालों की कुंडली तैयार करने का फैसला हुआ।

तीन चरण

वाराणसी पुलिस दस्तक के तहत तीन चरणों में काम कर रही है। इसका पहला चरण अपराधियों के घर जाकर दस्तक देना और उनका पूरा रिकार्ड तैयार करना है। दूसरा चरण पहचान का होगा जिसके तहत सक्रिय बदमाशों की पहचान सुनिश्चित करना होगा। तीसरा तरण प्रहार है। जिसके पहले ऑपरेशन की पूरी रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके लिए एक एप्प भी विकसित किया जा रहा है। इस एप्प में बदमाशों की फोटो से लेकर हर नवीनतम जानकारी दर्ज होगी। इस एप्प का उपयोग वाराणसी पुलिस के लोग लाग इन कर कर सकेंगे।

दस्तक के पहले चरण में 2766 बदमाशों का सत्यापन होना है। अपनी तरह के इस नायाब योजना ने रफ्तार पकड़ लिया है।

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