cyber crime के खिलाफ लड़ाई में मजबूत हथियार बन सकता है यह वाला सिस्टम

cyber crime

cyber crime से लड़ाई सिर्फ भारत के मोदी सरकार ही नहीं दुनिया भर के देशों के लिए सबसे अहम हो गया है। सारे जतन करने के बाद भी cyber crime से आम जनता त्रस्त है। हर दिन बड़ी संख्या में लोग इसके शिकार हो रहे हैं। ऐसे में इसके खिलाफ लड़ाई में कौन में कौन सा सिस्टम सबसे मजबूत हथियार साबित होगा।

cyber crime के लिए चाहिए यह ढांचा

एकीकृत साइबर अपराध ढांचा भारत में धोखाधड़ी से निपटने के तरीके को बदल सकता है। यदि DigiKavach, Digital Intelligence Platform (DIP), और Samanvay Portal जैसे डिजिटल संसाधनों और प्लेटफ़ॉर्मों को एक मज़बूत साइबर अपराध-रोधी इकोसिस्टम के रूप में एकीकृत किया जाए, तो यह भारत की ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
• DigiKavach को डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के लिए त्वरित चेतावनी और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है।
• DIP कानून प्रवर्तन एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों और नियामक निकायों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने की सुविधा प्रदान करता है।
• Samanvay Portal विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सुव्यवस्थित करता है।
इन उपकरणों के संयोजन से एक “डिजिटल जाल” (digital dragnet) बन सकता है, जो निगरानी को सशक्त बनाएगा, प्रतिक्रिया समय को घटाएगा और धोखाधड़ी के प्रभाव को तत्काल निष्क्रिय करेगा।
इस इकोसिस्टम को और मज़बूती देने वाले टूल्स में शामिल हैं:
SEBI-सत्यापित UPI प्रणाली (अक्टूबर 2025 में लॉन्च होगी): SEBI-पंजीकृत बिचौलियों से जुड़े UPI लेनदेन में प्राप्तकर्ताओं की वास्तविक समय में पुष्टि अनिवार्य करेगी — जिससे छद्म पहचान और नकली लेनदेन की संभावना घटेगी।
MuleHunter.AI: RBI Innovation Hub द्वारा विकसित यह एआई उपकरण म्यूल अकाउंट्स (ऐसे बैंक खाते जो चुराए गए धन को स्थानांतरित करने के लिए बनाए जाते हैं) की पहचान करता है। यह फ्रॉड चैन की इस अहम कड़ी को तोड़कर साइबर अपराधियों के नेटवर्क को कमज़ोर कर सकता है।
इन सभी टूल्स को एक केंद्रीकृत डिजिटल कमांड के अंतर्गत एकीकृत करना न सिर्फ़ साइबर अपराध पर लगाम लगाएगा, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर वित्तीय सुरक्षा ढांचे के लिए एक मिसाल भी बना सकता है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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