गलत जानकारी समाज के लिए खतरा क्यों बन गई है? अश्विनी वैष्णव का AI Summit में बड़ा अलर्ट

डीपफेक और भ्रामक कंटेंट से समाज का भरोसा कमजोर हो रहा है। IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने AI Impact Summit में 30 देशों के साथ मिलकर बनाए जा रहे ‘सुरक्षा कवच’ को इसका समाधान बताया।
अश्वनी वैष्णव डीपफेक सुरक्षा कवच फाइल फोटो

अगर किसी नेता का वीडियो आपकी आंखों के सामने बोल रहा हो, लेकिन वह असली न हो, तो आप कैसे पहचानेंगे? यही सवाल आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा डिजिटल संकट बन चुका है। इसी खतरे की ओर इशारा करते हुए केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ कहा कि गलत जानकारी अब सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि समाज की स्थिरता के लिए सीधा खतरा बन चुकी है।

AI Impact Summit में क्या बोले अश्विनी वैष्णव?

AI Impact Summit के मंच से मंत्री ने कहा कि डीपफेक और AI-आधारित भ्रामक सूचनाएं सामाजिक विश्वास को कमजोर कर रही हैं। उनका जोर इस बात पर था कि इस समस्या से किसी एक देश के कानून या तकनीक से नहीं निपटा जा सकता। इसके लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है।

यहीं से सामने आया एक बड़ा प्रस्ताव, ‘ग्लोबल शील्ड अगेंस्ट डीपफेक्स’, जिसे भारत 30 से अधिक देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ा रहा है।

खास रिपोर्ट की वीडियोः

‘सुरक्षा कवच’ आखिर है क्या?

‘सुरक्षा कवच’ कोई एक टूल नहीं, बल्कि एक साझा वैश्विक ढांचा है। इसका मकसद डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया और AI के दुरुपयोग से निपटने के लिए तकनीकी और कानूनी समाधान तय करना है।

प्रस्तावित प्रमुख उपायों में शामिल हैं:

  • AI-जनित कंटेंट पर अनिवार्य वॉटरमार्किंग और स्पष्ट लेबलिंग
  • कॉपीराइट और डिजिटल पहचान की मजबूत सुरक्षा
  • सीमा-पार सहयोग के लिए साझा नियम

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‘सुरक्षा कवच’ के तीन बड़े उद्देश्य

1. गलत और भ्रामक जानकारी पर रोक

डीपफेक झूठी कहानियां गढ़ सकते हैं, चुनाव प्रभावित कर सकते हैं और किसी की छवि को मिनटों में नुकसान पहुंचा सकते हैं। सुरक्षा कवच प्रामाणिकता जांचने वाले टूल और वैश्विक फैक्ट-चेकिंग सहयोग को बढ़ावा देगा।

2. डेटा उल्लंघन और पहचान चोरी की रोकथाम

AI का दुरुपयोग अक्सर फिशिंग और प्रतिरूपण से जुड़ा होता है। ट्रेसबिलिटी और वॉटरमार्किंग से नकली कंटेंट को अपराध में इस्तेमाल करना कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।

3. सामाजिक विश्वास को मजबूत करना

जब कंटेंट सत्यापित होगा, तो नागरिकों का डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा बढ़ेगा। सरकारें और संस्थाएं सीमाओं के पार एक जैसे डिटेक्शन मैकेनिज्म पर काम कर सकेंगी।

यह पहल व्यवहार में कैसे मदद करेगी?

  • गलत जानकारी: वैश्विक स्तर पर वॉटरमार्किंग और फर्जी कंटेंट की तेज पहचान
  • डेटा जोखिम: सिंथेटिक मीडिया से होने वाले प्रतिरूपण हमलों पर लगाम
  • भ्रामक अभियान: साझा कानूनी ढांचे, समन्वित कार्रवाई और जन-जागरूकता कार्यक्रम

सिर्फ कानून बनाने से समस्या हल नहीं होगी। विशेषज्ञ यह नोटिस करेंगे कि अगर प्लेटफॉर्म्स पर सख्त अनुपालन और आम लोगों के लिए आसान पहचान टूल नहीं हुए, तो नियम कागजों तक सीमित रह जाएंगे।
मजबूत संस्करण यह है कि तकनीक, कानून और नागरिक जागरूकता तीनों को एक साथ आगे बढ़ाया जाए। ‘सुरक्षा कवच’ इसी संतुलन की कोशिश करता है।

निष्कर्ष

30 देशों के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा ‘सुरक्षा कवच’ वैश्विक साइबर सहयोग की दिशा में बड़ा कदम है। तकनीकी सुरक्षा, कानूनी तालमेल और जन-जागरूकता को जोड़कर यह पहल डीपफेक और गलत जानकारी के खतरे को कम कर सकती है। अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में भारत खुद को एक भरोसेमंद डिजिटल भविष्य के केंद्र में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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21-10-2026