योगी के इस फार्मूले को समझिए, यह बुलडोजर की तरह ही देश भर में लोकप्रिय होगा

योगी जी
👁️ 470 Views

योगी आदित्यनाथ जो करते हैं देर सबेर सबको मानना ही पड़ता है। फिर चाहे वो बुलडोजर का मामला हो या फिर भ्रष्टाचार से निपटने का। बुलडोजर मामले में सुप्रीम कोर्ट तक ने यूपी सरकार की प्रशंसा की है। फिलहाल हम जिस फार्मूले की बात करने जा रहे हैं उसे भी देर सबेर सबको मानना पड़ेगा। यह कोई चकित करने वाली बात नहीं होगी कि आने वाले समय में आप कई राज्यों को इस फार्मूले को अपनाते हुए देखें जैसा कि बुलडोजर कार्रवाई में हुई था।

क्या है योगी का फार्मूला

आप आजकल यूपी में संपत्ति की घोषणा ना करने वाले सरकारी कर्मचारियों के वेतन रोके जाने की खबर पढ़ते होंगे। यह कार्रवाई योगी के उसी फार्मूले का हिस्सा है। देश भर में भ्रष्टाचार से लगभग हर आदमी पीड़ित है। ईमानदारी का चोला पहन कर राजनीति में आई आम आदमी पार्टी पर आकंठ भ्रष्टाचार का आरोप है। इन आरोपों के चलते आप के सर्वे सर्वा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल स्वयं दिल्ली के शराब घोटाले में जेल में हैं। योगी ने इसे रोकने के लिए एक खास फार्मूला तय किया है। अभी इसका उत्तर प्रदेश में शुरूआत है।इस आदेश के परिणाम आने में समय लगेगा।


अपराधियों और माफियाओं के विरूद्ध उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुलडोजर चलाया। उनके द्वारा खड़ी की गई अवैध संपत्तियों को ध्वस्त किया गया। ये प्रयोग इतना सफल रहा कि उत्तर प्रदेश में अपराध घटे। अपराधी प्रदेश छोड़कर भागने लगे। प्रदेश की कामयाबी देख अन्य कुछ राज्यों ने भी यही नीति अपनाई। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों के बुलडोजर एक्शन पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के एक्शन की प्रशंसा की।
प्रदेश में भ्रषटाचार रोकने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक आदेश में राज्य के आईएएस, आईपीएस, पीपीएस, पीसीएस अफसरों की तर्ज पर राज्य कर्मचारियों को भी ऑनलाइन संपत्तियों का ब्यौरा देना अनिवार्य कर दिया है। सभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा ऑनलाइन मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया था।

हालाकि शिक्षकों, निगम कर्मचारी, स्वायत्तशासी संस्थाओं के कर्मचारियों को अभी इसमें शामिल नहीं किया गया। सरकार ने इसके लिए समय सीमा निर्धारित करते हुए इसके लिए आखिरी तारीख 31 अगस्त तय की। आदेश के बाद भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने संपत्ति घोषित नहीं की । सरकार ने इनकी सैलरी रोकने का आदेश किया। पहले खबर आई थी इनका प्रमोशन भी रोका जा रहा है। अब यूपी सरकार ने कर्मचारियों को एक महीने का और वक्त दिया है। ये सरकार की ओर से आखिरी अल्टीमेटम माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक मात्र 71 फीसदी कर्मचारियों ने ही अपनी चल और अचल संपत्ति की जानकारी अपलोड की है। 2,44,565 राज्य कर्मचारियों की संपत्ति का ब्यौरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाया।

उत्तर प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी ने सभी विभागों के प्रमुखों को पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था कि सभी सरकारी कर्मचारी 31 अगस्त तक चल-अचल संपत्ति घोषित करें नहीं तो उनका प्रमोशन नहीं होगा। इसके साथ ही कर्मचारियों की अगस्त महीने की सैलरी भी नहीं आएगी। सरकारी कर्मियों को संपत्ति घोषित करने का निर्देश पहले भी दिया जा चुका है लेकिन संतोषजनक रिस्पांस नहीं मिलने पर सरकार ने कड़ा फैसला लिया है।

यूपी सरकार ने अब आदेश दिया है कि कर्मचारी दो अक्तूबर तक संपत्ति का ब्योरा दे सकेंगे। पहले ब्योरा न देने वालों कर्मचारियों की अगस्त महीने की सैलरी रोकने का आदेश दिया गया था। 17 अगस्त को जब यह आदेश जारी हुआ था, तब 131748 यानी 15 फीसदी राज्य कर्मियों ने ही पोर्टल पर अपनी संपत्ति दर्ज की थी। 20-31 अगस्त के बीच यह बढ़कर 71 फीसदी हो गया।

उत्तर प्रदेश में कुल 846640 राज्य कर्मी हैं। इनमें से 602075 ने ही मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा दिया। विवरण दर्ज कराने के आदेश पर जीपी मुख्यालय ने नियुक्ति विभाग को पत्र भेजकर उनके कार्मिकों के लिए संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए कुछ और समय दिए जाने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि त्योहारों और पुलिस भर्ती परीक्षा के कारण तमाम पुलिस कर्मी समय से अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दे पाए।

शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, जिन अधिकारियों-कर्मचारियों का अगस्त माह का वेतन रोका गया, इसे तभी जारी किया जाएगा, जब वे संपत्ति का ब्यौरा दे देंगे। उनकी संपत्ति का ब्यौरा मिलने पर वेतन देने का फैसला संबंधित विभाग शासन से वार्ता के बाद ले सकेंगे। लगता है कि इसी पत्र के बाद विवरण दर्ज कराने के लिए एक माह का और समय दिया गया है।
आज हालत यह है कि देख गया है कि प्रधान या स्थानीय निकाय का चेयरमैन बनते ही उसके पास लंबी चौड़ी गाड़ी आ जाती है। यह तभी रूकेगी जब,उसके और उसके परिवार की चल अचल संपत्ति चुने जाते ही शपथ से पूर्व घोषित की जाए। विधायकों और विधान परिषद सदस्य,विभिन्न बोर्ड के पदाधिकारी और सदस्यों पर भी यह व्यवस्था लागू होनी चाहिए।
समाज में फैले भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए देश को सख्त निर्णय लेने होंगे।

यह भी पढ़ें


Latest Posts

Breaking News
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | Chrome Extensions से फैल रहा खतरनाक Stanley Malware | फिल्म धुरंधर: कहानी, कास्ट, रिलीज़ डेट और ट्रेंडिंग सवाल | पूरी जानकारी | ऑनलाइन धोखाधड़ी मामलों में बैंक खाते फ्रीज़ करने से पहले जाँच क्यों जरूरी है ? MHA SOP 2026 | म्यूल अकाउंट क्यों नहीं रुक रहे? RBI के सख्त KYC नियमों के बावजूद बड़ा सच | एकादशी व्रत: महत्व, नियम, पूजा विधि और वैज्ञानिक दृष्टि | 15 करोड़ पासवर्ड डार्कवेब पर लीक: Gmail, Facebook, Instagram सहित बड़े प्लेटफॉर्म्स प्रभावित | 2FA क्यों है जरूरी | Bluetooth Surveillance Risk: उपयोग में न हो तो ब्लूटूथ बंद रखें, डेनमार्क की चेतावनी से क्या सीखें | 77वां गणतंत्र दिवस: ग्रेट रन ऑफ कच्छ में फहरा दुनिया का सबसे विशाल खादी तिरंगा | ₹50,000 से कम की ठगी में अब कोर्ट नहीं जाना होगा, जानिए कैसे मिलेगा पैसा वापस | Ex-Serviceman Vehicle Fraud Case: 2023 में पूर्व सैनिक के साथ हुआ अन्याय, 2026 में Delhi Police ने दिलाया न्याय, फर्जी दस्तावेज़ों वाला गिरोह बेनकाब |
01-02-2026